DGP Bilaspur Police Review : बिलासपुर प्रवास पर पहुंचे डीजीपी अरुण देव गौतम ने रेंज कार्यालय के सभागार में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक की शुरुआत में उन्होंने फील्ड अफसरों से सीधा संवाद किया और मौजूदा कानून-व्यवस्था की जमीनी तस्वीर जानी। अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि अपराध नियंत्रण में रफ्तार के साथ-साथ निरंतरता भी जरूरी है.
24 घंटे में लूटकांड खुलासा, टीम को खुली तारीफ
राजकिशोर नगर में सर्राफा व्यवसायी के साथ हुई लूट की वारदात पर डीजीपी ने विस्तार से जानकारी ली। 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी और शत-प्रतिशत माल की बरामदगी को उन्होंने प्रोफेशनल पुलिसिंग का उदाहरण बताया। डीजीपी ने अंतर्राज्यीय समन्वय और त्वरित इनपुट शेयरिंग को इस सफलता की बड़ी वजह बताया.
गश्त, पेट्रोलिंग और संदिग्ध चेकिंग पर जोर
डीजीपी ने निर्देश दिए कि गश्त–पेट्रोलिंग को समयबद्ध और परिणामोन्मुख बनाया जाए। होटल-लॉज की नियमित चेकिंग, संदिग्धों की पहचान, तथा सर्राफा दुकानों और बैंकों के आसपास विजिबल पुलिसिंग बढ़ाने पर विशेष फोकस रखा जाए। सीसीटीवी कवरेज की समय-समय पर जांच कर कमियों को तुरंत दूर करने को भी कहा गया.
थानों में संवेदनशीलता और पर्यवेक्षण की कसौटी
बैठक में राजपत्रित अधिकारियों को थानों का गुणवत्तापूर्ण पर्यवेक्षण करने की हिदायत दी गई। फरियादियों की शिकायत सुनने की प्रक्रिया को संवेदनशील बनाने, थाना प्रभारी द्वारा स्वयं रिपोर्ट सुनने और एफआईआर की निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। संदिग्ध मर्ग मामलों की जांच सूक्ष्मता से करने के निर्देश भी दिए गए.
ई-चालान, ई-साक्ष्य और फायर सेफ्टी पर फोकस
अभियोजन से जुड़े अधिकारियों को आईसीजेएस के तहत ई-चालान और ई-साक्ष्य की प्रक्रिया को तेज करने के लिए न्यायालय और थानों के समन्वय को मजबूत करने को कहा गया। साथ ही अग्निशमन अधिकारियों के साथ फायर सेफ्टी और फायर ऑडिट की समीक्षा हुई; हालिया घटनाओं के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन से साझा करने के निर्देश दिए गए.
रेंज स्तर पर सतत मॉनिटरिंग के निर्देश
डीजीपी ने रेंज के सभी जिलों में दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मीटिंग में तय की गई प्राथमिकताएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में उनके असर दिखें—यही प्रोएक्टिव पुलिसिंग की असली कसौटी है.






