सीजी भास्कर, 27 अगस्त : अगर आप बस्तर के दंतेवाड़ा जिले की यात्रा कर रहे हैं तो बैलाडिला की पहाड़ियों के बीच स्थित ढोलकल गणेश का पवित्र स्थल आपको सीधा बादलों से जोड़ देता है। समुद्र तल से लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर यह जगह भगवान गणेश का निवास स्थान मानी जाती है। (Dholkal Ganesh Bastar) लोककथाओं के अनुसार यहीं भगवान गणेश और भगवान परशुराम के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। परशुराम के फरसे से गणेशजी का एक दांत टूट गया और तभी से उन्हें ‘एकदंत’ कहा जाने लगा। इस घटना की याद में आज भी पास के गांव को फरसपाल कहा जाता है।
ढोलकल की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है और दक्षिण भारतीय शैली में काले चट्टान पर ललितासन मुद्रा में उकेरी गई है। यह 36 इंच ऊंची और 19 इंच मोटी है। कहा जाता है कि इसे छिंदक नागवंशी राजाओं ने शिखर पर स्थापित कराया था। (Dholkal Ganesh Bastar) यहां के भोगामी आदिवासी अपनी उत्पत्ति ढोलकट्टा की महिला पुजारी से जोड़ते हैं, जो इस आस्था को और गहरा बनाता है।
ढोलकल तक पहुंचने के लिए दंतेवाड़ा से 13 किलोमीटर दूर फरसपाल गांव तक सड़क मार्ग है, इसके बाद लगभग तीन किलोमीटर की पैदल चढ़ाई शुरू होती है। घने जंगल, ठंडी हवाएं और बादलों के बीच की यह यात्रा रोमांचक अनुभव देती है। शिखर पर पहुंचने के बाद गणेश प्रतिमा और प्राकृतिक दृश्य मन को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। (Dholkal Ganesh Bastar) वर्तमान में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन इस पवित्र स्थल के विकास पर काम कर रहा है, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक यहां की पौराणिक गाथा और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकें।