रिपोर्टर – आशुतोष सिंह
सीजी भास्कर, 25 मई। गरियाबंद जिले में डीजल संकट के बीच अब लोगों की नाराजगी खुलकर सामने (Diesel Crisis) आने लगी है। कई इलाकों में सुबह से ही पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और किसान अपनी जरूरत भर डीजल के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। इसी बीच एक वायरल वीडियो ने पूरे इलाके में नई चर्चा छेड़ दी है।
मैनपुर विकासखंड के धुरवागुड़ी स्थित सिहायलटी के जय जवान पेट्रोल पंप को लेकर सामने आए आरोपों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि संकट के समय डीजल लेने पहुंचे लोगों से तय कीमत से ज्यादा पैसे लिए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

20 लीटर डीजल के नाम पर ज्यादा रकम लेने का आरोप : Diesel Crisis
स्थानीय लोगों और वायरल वीडियो के अनुसार पेट्रोल पंप में डीजल लेने पहुंचे लोगों को 20 लीटर की पर्ची दी जा रही है और इसके बदले 2100 रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। लोगों का कहना है कि मशीन पर डीजल की कीमत करीब 100 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर दिखाई दे रही थी। इस हिसाब से 20 लीटर डीजल की राशि लगभग 2004 रुपये बनती है, लेकिन उससे ज्यादा रकम लिए जाने की बात अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मजबूरी में ज्यादा पैसे देने को तैयार किसान
ग्रामीणों का आरोप है कि डीजल की कमी के कारण लोग मजबूरी में अतिरिक्त पैसे देकर ईंधन लेने को तैयार हो रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि अगर ज्यादा पैसे नहीं दिए जाएं तो समय पर डीजल मिलना मुश्किल हो जाता है। खेती किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में डीजल की जरूरत सबसे ज्यादा (Diesel Crisis) होती है। खेतों की जुताई, सिंचाई और दूसरी कृषि गतिविधियां पूरी तरह डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में संकट के दौरान बढ़ती परेशानी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
खेती पर असर पड़ने की बढ़ी आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही मौसम और बढ़ती महंगाई ने किसानों की हालत कमजोर कर दी है। ऊपर से डीजल की कमी और अतिरिक्त वसूली के आरोपों ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। कई किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संकट के समय अगर लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया जाएगा तो गरीब और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
जिले में ईंधन वितरण को लेकर समय समय पर प्रशासन की ओर से दिशा निर्देश जारी किए जाते रहे हैं ताकि कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके। इसके बावजूद इस तरह के आरोप सामने आने से निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब स्थानीय लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग (Diesel Crisis) कर रहे हैं। साथ ही दूसरे पेट्रोल पंपों की भी जांच कराने की मांग तेज हो गई है ताकि यह साफ हो सके कि कहीं और भी इसी तरह की वसूली तो नहीं हो रही।



