सीजी भास्कर, 17 सितंबर। साइबर ठगी की शिकार एक महिला चिकित्सक की ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest Fraud) के दौरान ही ‘कार्डियक अरेस्ट’ से मौत हो गई। 76 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी चिकित्सक को साइबर ठगों ने लगातार तीन दिन तक परेशान किया और उनसे 6.60 लाख रुपये की ठगी कर ली। हैरानी की बात यह रही कि निधन के बाद भी ठग उन्हें ऑनलाइन धमकियां भेजते रहे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर आइटी अधिनियम और बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
पुलिस ने बुधवार को बताया कि साइबर ठगों ने पांच सितंबर को महिला से एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप से वीडियो काल कर संपर्क किया। इसमें बेंगलुरु पुलिस का लोगो डिस्प्ले पिक्चर में दिखाया गया था। कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर वृद्ध चिकित्सक पर मानव तस्करी के फर्जी आरोप लगाए गए और पेंशन खाते से 6.60 लाख रुपये की ठगी (Digital Arrest Fraud) कर ली गई।
पीड़िता के बेटे ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि यह “डिजिटल गिरफ्तारी” धोखाधड़ी (Digital Arrest Fraud) सीधे उनकी मां की असामयिक मृत्यु का कारण बनी। पुलिस के अनुसार, कॉल करने वाले ने एक फर्जी “जांच रिपोर्ट” भी साझा की, जिसमें आधार कार्ड के विवरण का उल्लेख था।
अगले तीन दिनों तक महिला को सुप्रीम कोर्ट, कर्नाटक पुलिस विभाग, ईडी और आरबीआइ से कथित तौर पर प्राप्त फर्जी दस्तावेज दिखाकर धमकाया गया। पुलिस ने बताया कि इस तरह की धोखाधड़ी (Digital Arrest Fraud) का उद्देश्य पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़कर पैसे ऐंठना है।
हैदराबाद पुलिस ने इस घटना के बाद जनता से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई प्रक्रिया मौजूद ही नहीं है। आमजन से अनुरोध है कि किसी भी फोन कॉल पर अपने बैंक खाता विवरण, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।





