सीजी भास्कर, 14 जनवरी। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली पुलिस को एक हाई-प्रोफाइल डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अहम सफलता (Digital Arrest Scam) मिली है। बुजुर्ग डॉक्टर दंपती से की गई करीब 14 करोड़ 85 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने अब तक लगभग 1.90 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी है। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पीड़ितों को करीब 17 दिनों तक मानसिक दबाव में रखकर, उन्हें ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का डर दिखाया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला सुनियोजित साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसमें फर्जी कॉल, वीडियो कॉल और मल्टी-लेयर बैंक अकाउंट्स के जरिए रकम को इधर-उधर घुमाया गया।
फोन और वीडियो कॉल से बनाया मानसिक कैदी
जांच में सामने आया है कि साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले 81 वर्षीय डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी 77 वर्षीय पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा को 24 दिसंबर से 9 जनवरी तक लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रखा गया। ठगों ने खुद को टेलीकॉम कंपनी और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि दंपती के नाम से अवैध गतिविधियां सामने आई हैं।
डर और गिरफ्तारी की धमकी देकर दोनों को घर से बाहर न निकलने, किसी रिश्तेदार या परिचित से बात न करने के लिए मजबूर (Digital Arrest Scam) किया गया। इस दौरान उनसे बार-बार अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए।
700 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल
दिल्ली पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम छिपाने के लिए जालसाजों ने 700 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया। पहले चरण में पैसे को सात प्राइमरी खातों में ट्रांसफर किया गया, इसके बाद तेजी से 200 से 300 अन्य खातों में घुमाया गया, ताकि पैसों का ट्रेल तोड़ा जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका संगठित साइबर अपराध गिरोहों द्वारा अपनाया जाता है, जिससे रकम को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
कई राज्यों में घूमती रही करोड़ों की रकम
जांच के दौरान पैसों की ट्रांसफर टाइमलाइन भी सामने आई है।
26 दिसंबर को असम के गुवाहाटी स्थित खाते में करीब 1.99 करोड़ रुपये भेजे गए।
29 और 30 दिसंबर को गुजरात के वडोदरा में दो बार दो-दो करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
2 जनवरी को दिल्ली के मयूर विहार में 2 करोड़ रुपये पहुंचे।
5 जनवरी को मुंबई के नेपियन सी रोड स्थित खाते में करीब 2.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
पुलिस के मुताबिक, यह रकम कई राज्यों में तेजी से घुमाई गई ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
अभी गिरफ्तारी नहीं, लेकिन शिकंजा कसता जा रहा है
दिल्ली पुलिस ने बैंक और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ मिलकर जुड़े खातों की पहचान शुरू कर दी है। अब तक कई अकाउंट्स को फ्रीज किया जा चुका है और आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान तेजी से की जा रही है।
क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’? सच्चाई जानना जरूरी
कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई भी प्रक्रिया मौजूद नहीं है। यह सिर्फ साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला डराने का तरीका (Digital Arrest Scam) है। ठग फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या बैंक का अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं और कहते हैं कि आपके खिलाफ मामला दर्ज है।
इसके बाद पीड़ित को घंटों कॉल पर बैठाए रखा जाता है, उसे बाहर निकलने या किसी से बात करने से रोका जाता है, ताकि वह मदद न मांग सके।
ऐसे ठगी से कैसे बचें?
किसी भी एजेंसी की ओर से फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं की जाती
कोई भी सरकारी विभाग जांच के नाम पर पैसे नहीं मांगता
डराने वाले कॉल आते ही तुरंत कॉल काटें
साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं
नजदीकी पुलिस स्टेशन को तुरंत सूचना दें





