सीजी भास्कर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ ने शिक्षा प्रशासन में तकनीक के प्रभावी और दूरदर्शी उपयोग के माध्यम से डिजिटल सुशासन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (IBITF) ने राज्य के विद्या समीक्षा केंद्र को शिक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-संचालित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए इसे राष्ट्रीय मानक के रूप में मान्यता दी है। यह पहल (Digital Education Governance Chhattisgarh) की दिशा में राज्य की मजबूत प्रतिबद्धता को स्पष्ट करती है।
आईबीआईटीएफ के अनुसार, विद्या समीक्षा केंद्र पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की अवधारणा को व्यवहारिक धरातल पर साकार करता है। यह केंद्र छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा क्रियान्वित एक अभिनव डिजिटल पहल है, जिसने शिक्षा व्यवस्था में डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है। यह पहल दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ सरकार (Digital Education Governance Chhattisgarh) को केवल नीति तक सीमित न रखते हुए जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर रही है।
छत्तीसगढ़ देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक शिक्षा प्रणालियों में शामिल है, जहां 48,500 से अधिक शासकीय विद्यालय, 39 लाख से अधिक विद्यार्थी तथा लगभग 1.8 लाख शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी कार्यरत हैं। इतने विशाल तंत्र के संचालन में पहले बिखरे हुए डेटा, सीमित रियल-टाइम निगरानी और निर्णयों में विलंब जैसी समस्याएं सामने आती थीं। विद्या समीक्षा केंद्र ने इन चुनौतियों का समाधान करते हुए एक केंद्रीकृत, रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है, जिससे शिक्षा नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक सटीक और परिणामोन्मुख हो सका है।
विद्या समीक्षा केंद्र के अंतर्गत UDISE, HRMIS, पीएम पोषण, PGI, APAAR ID, आधार और जीआईएस मैपिंग जैसे प्रमुख डेटाबेस का एकीकृत उपयोग किया जा रहा है। इस समन्वित व्यवस्था के माध्यम से विद्यालय अधोसंरचना, शिक्षक तैनाती, छात्र उपस्थिति, अधिगम परिणाम और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सतत निगरानी संभव हो पाई है। यह समग्र दृष्टिकोण (Digital Education Governance Chhattisgarh) को मजबूत आधार प्रदान करता है।
केंद्र में प्रयुक्त एआई-आधारित एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव मॉडल संभावित ड्रॉपआउट, अधिगम अंतराल और जोखिम वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इससे नीतिगत हस्तक्षेप पहले की तुलना में अधिक सटीक, त्वरित और प्रभावी हो पाए हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और समान अवसरों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विद्या समीक्षा केंद्र की मापनीय उपलब्धियां इसकी प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं। राज्य में लगभग 87 प्रतिशत विद्यार्थियों के लिए APAAR ID का सृजन, करीब 89 प्रतिशत आधार सत्यापन और 2.13 करोड़ से अधिक पाठ्यपुस्तकों की बारकोड-आधारित ट्रैकिंग की गई है। इस प्रक्रिया से अनुमानित 50 करोड़ रुपये की बचत संभव हो सकी है, जो (Digital Education Governance Chhattisgarh) के आर्थिक और प्रशासनिक लाभों को भी दर्शाती है।
इस केंद्र को एक समर्पित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और सक्रिय कॉल सेंटर का सहयोग प्राप्त है, जो शिकायत निवारण, डेटा सत्यापन, फील्ड-स्तरीय फीडबैक और हितधारकों से निरंतर संवाद को सशक्त बनाते हैं। इससे शासन और नागरिकों के बीच विश्वास और सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आईबीआईटीएफ ने यह भी रेखांकित किया है कि विद्या समीक्षा केंद्र डेटा-आधारित शासन संस्कृति को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। एनएम-आईसीपीएस मिशन के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा स्थापित प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र के रूप में, आईबीआईटीएफ ने इसे शिक्षा सुधार और तकनीक-सक्षम सुशासन के लिए राष्ट्रीय मानक बताते हुए सराहा है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को (Digital Education Governance Chhattisgarh) के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में स्थापित करती है।




