सीजी भास्कर, 17 जून : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा शिकंजा कसते हुए प्रदेश के पांच जिलों में एक साथ छापेमारी की है। मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े इस मामले में ईडी की टीमों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी जब्त की है। DMF घोटाला (DMF Scam Investigation) से जुड़ी यह कार्रवाई करीब 575 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के तहत की गई है, जिससे प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
कोरबा और धमतरी जिले में सबसे ज्यादा कैश जब्त
ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय के नेतृत्व में रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर जिलों में कुल 9 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। इनमें चार आवासीय परिसरों और पांच व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में लिया गया। सूत्रों के अनुसार सबसे अधिक नकदी कोरबा और धमतरी जिले के परिसरों से बरामद हुई है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी तैनात किए गए थे।
कई कारोबारियों के ठिकानों पर जांच
जानकारी के मुताबिक ईडी ने कारोबारी प्रकाश सालुंके, किशोर एग्रो से जुड़े कारोबारी शाश्वत लुनावत, मानसून एग्रो के प्रमोटर राजेश गुप्ता, कारोबारी दीपेश गांधी सहित अन्य लोगों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। जांच एजेंसी को आशंका है कि कथित घोटाले की राशि विभिन्न कारोबारी चैनलों और लेनदेन के माध्यम से इधर-उधर की गई हो सकती है।
दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य मिले
तलाशी अभियान के दौरान ईडी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि कथित घोटाले के पूरे वित्तीय नेटवर्क और लाभार्थियों की पहचान की जा सके। DMF फंड अनियमितता (DMF Scam Investigation) की जांच अब दस्तावेजी और डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों के जरिए राशि डायवर्ट करने का आरोप
जांच एजेंसी को संदेह है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित DMF फंड को कथित तौर पर ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया। जांच में यह भी पड़ताल की जा रही है कि सरकारी परियोजनाओं और ठेकों की मंजूरी के बदले 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया था। ईडी अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
पहले भी कई बड़े नाम जांच के घेरे में
इस मामले में पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और कथित बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी समेत कई नाम पहले से जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। वर्ष 2024 और 2025 में भी ईडी ने DMF घोटाले को लेकर कई स्थानों पर छापेमारी की थी और करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच की गई थीं। ताजा कार्रवाई को अब तक की महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक माना जा रहा है।
क्या है DMF घोटाला?
प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और ईडी की रिपोर्ट के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने धारा 120-बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा से जुड़े विभिन्न टेंडरों के आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं और कुछ पक्षों को कथित तौर पर अवैध लाभ पहुंचाया गया। ईडी के अनुसार कई कारोबारी, ठेकेदार और कथित बिचौलिए इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं।





