सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Drug Inspection) की ताबड़तोड़ छापेमारी से दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। राज्य शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे 15 दिवसीय सघन जांच अभियान के तहत विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है।
यह पूरा अभियान ‘सही दवा-शुद्ध आहार’ थीम के अंतर्गत चलाया जा रहा है, जिसमें सभी जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान के तीसरे चरण में औषधि शाखा का मुख्य फोकस नशीली और मन:प्रभावी (साइकोट्रोपिक) दवाओं की अवैध बिक्री को रोकना है। इसी कड़ी में दुर्ग के कई इलाकों में की गई औचक जांच के बाद पूरे जिले के तंत्र में खलबली मची हुई है।
इन 6 बड़े मेडिकल स्टोर्स पर पड़ी रेड
औषधि विभाग की विशेष टीम ने दुर्ग और भिलाई के 6 प्रमुख फुटकर औषधि विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर एक साथ दबिश दी। जिन दुकानों पर यह कार्रवाई की गई, उनमें जलाराम मेडिकोज (शंकर नगर, दुर्ग), जलाराम मेडिकल (मोतीपारा, दुर्ग), अमित मेडिकल (रेलवे स्टेशन रोड, दुर्ग), श्रीराम मेडिकल (उतई), महिमा मेडिकल (उतई) और भिलाई के सुपेला स्थित प्रसिद्ध मेडप्लस फार्मेसी शामिल हैं।
टीम ने इन सभी दुकानों में रखे स्टॉक, बिलों और विशेष रूप से डॉक्टर के पर्चे पर दी जाने वाली प्रतिबंधित दवाओं के क्रय-विक्रय दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। इस सघन (Drug Inspection) (दवा दुकान जांच) के दौरान कई गंभीर खामियां और अनियमितताएं उजागर हुईं।
निरस्त हो सकते हैं लाइसेंस
जांच टीम ने दस्तावेजों के मिलान और भौतिक सत्यापन के बाद पाया कि इन 6 में से 3 बड़ी फर्मों में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इन दुकानों में खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड में भारी हेराफेरी और अनियमितता पाई गई। विभाग ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए इन तीनों डिफॉल्टर दवा दुकानों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर दिया है।
संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनके लाइसेंस निरस्त करने जैसी सख्त अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत की गई इस (Drug Inspection) (दवा दुकान जांच) में लापरवाही बरतने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
आगे भी जारी रहेगा हंटर
खाद्य एवं औषधि विभाग ने जिले की सभी दवा दुकानों को सख्त हिदायत दी है कि वे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 तथा नियम 1945 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। बिना वैध डॉक्टर पर्ची के प्रतिबंधित या नींद की दवाएं बेचने वालों पर सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अभियान अभी थमा नहीं है; आने वाले दिनों में जांच की यह रफ्तार और तेज होगी, जिससे गलत तरीके से दवा बेचने वाले कारोबारियों की नींद उड़ी हुई है।


