सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से इस समय की सबसे बड़ी और सनसनीखेज राजनीतिक खबर (Election Controversy) सामने आ रही है। कुछ समय पहले क्षेत्र में हुए चर्चित अफीम कांड समेत कई बड़े मामलों का खुलासा कर सुर्खियों में आए ग्राम पंचायत समोदा के सरपंच अरुण गौतम खुद एक बड़े कानूनी विवाद में घिर गए हैं। चुनाव याचिका पर एक लंबी और गंभीर सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी पंचायत दुर्ग ने कड़ा फैसला सुनाते हुए अरुण गौतम के सरपंच निर्वाचन को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर दिया है। इस बड़े फैसले के बाद से पूरे दुर्ग संभाग के पंचायत चुनाव विवाद गलियारों में हड़कंप मच गया है।
मामलों की जानकारी छुपाना पड़ा भारी
इस मामले की जड़ें उनके नामांकन के समय दाखिल किए गए दस्तावेजों से जुड़ी हैं। दुर्ग कोर्ट ने 5 मई 2026 को जारी अपने अंतिम आदेश में यह स्पष्ट पाया कि अरुण गौतम ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत किए गए शपथ-पत्र में अपने खिलाफ लंबित गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी को पूरी तरह से छुपाया था। इसे छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियमों और पारदर्शिता मानदंडों का घोर उल्लंघन माना गया। इस गंभीर शिकायत को सही पाए जाने के बाद कोर्ट ने इस चुनावी धांधली को उजागर करते हुए इस पूरे (Election Controversy) (चुनाव विवाद) पर अपना अंतिम डंडा चला दिया है।
उप-चुनाव की तैयारी शुरू
कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद दुर्ग जिला प्रशासन ने समोदा पंचायत में नए सिरे से चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। आदेश के तहत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जनपद पंचायत दुर्ग को तत्काल प्रभाव से समोदा ग्राम पंचायत में उप-चुनाव कराने के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को विस्तृत रिपोर्ट भेजने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई 500 रुपये की प्रतिभूति राशि को भी ससम्मान वापस करने के आदेश दिए हैं। इस कानूनी दांवपेंच ने एक बार फिर समोदा में बड़े (Election Controversy) चुनाव विवाद को जन्म दे दिया है।
कांटे की टक्कर में बने थे सरपंच
यदि पूर्व के चुनावी इतिहास और आंकड़ों की बात करें, तो साल 2025 में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में समोदा ग्राम पंचायत की सीट पर बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। इस चुनाव में विजेता घोषित किए गए अरुण गौतम को कुल 869 मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ था, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भुनेश्वरी देशमुख ने 741 वोट हासिल किए थे। महज 128 वोटों के अंतर से जीती गई यह कुर्सी अब कानूनी जंग में पूरी तरह से ढह चुकी है, जिससे समोदा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है।


