सीजी भास्कर, 6 मई । प्रदेश में प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने के फैसले ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बिना पर्याप्त तैयारी के लागू की गई इस व्यवस्था के चलते बीते 15 दिनों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिससे करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। (Plastic bottle policy stalls liquor supply)
अधिकांश जिलों में मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही, जिसके कारण महंगी शराब और बीयर की मांग में तेजी देखी जा रही है।
बॉटलिंग बदलाव से उत्पादन पर असर : Plastic bottle policy stalls liquor supply
1 अप्रैल से प्लास्टिक (पीईटी) बोतलों में बॉटलिंग के आदेश के बाद डिस्टिलर और बॉटलर अचानक दबाव में आ गए। कांच की बोतलों से प्लास्टिक में बदलाव के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे, जिससे कई इकाइयों में उत्पादन और बॉटलिंग करीब 10 दिनों तक बंद रही। इस दौरान दुकानों का पुराना स्टॉक खत्म हो गया और बाद में शुरू हुआ उत्पादन भी मांग के मुकाबले काफी कम रहा। वर्तमान में दुकानों को जरूरत का केवल एक-तिहाई स्टॉक ही मिल पा रहा है।
राजस्व में भारी गिरावट, दुकानों पर असर
प्रदेश में रोजाना लगभग 70 करोड़ रुपए की देसी और सस्ती अंग्रेजी शराब की खपत होती है, लेकिन सप्लाई बाधित होने से सरकार को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। कई जगहों पर शाम होते-होते स्टॉक खत्म हो जाता है और दुकानों को बंद करना पड़ रहा है। देसी शराब की कमी के कारण महंगी शराब के काउंटरों पर भीड़ बढ़ गई है, जिससे व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है। (Plastic bottle policy stalls liquor supply)
कच्चे माल की कीमतों और सेटअप की चुनौती
प्लास्टिक बोतलों के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों में हाल के दिनों में 30 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा बड़े स्तर पर प्लास्टिक बोतल उत्पादन के लिए उद्योगों के पास पर्याप्त क्षमता नहीं है। कई बॉटलर अब खुद के प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इसमें समय लगेगा। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में नुकसान हुआ है, लेकिन आने वाले समय में व्यवस्था सामान्य होने और नुकसान की भरपाई की उम्मीद है।


