सीजी भास्कर, 06 जनवरी। दुर्ग जिले में प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी का चौंकाने वाला मामला सामने (Durg River Encroachment) आया है। शिवनाथ नदी पर एक ईंट-भट्टा ठेकेदार ने करीब 30 साल पहले अवैध एनीकट (अस्थायी पुल) बना लिया था और उसी के जरिए अपना व्यावसायिक परिवहन चला रहा था।
हैरानी की बात यह रही कि इतने वर्षों तक यह अवैध निर्माण प्रशासन की नजरों से ओझल रहा। मामला सामने आने के बाद सोमवार (5 जनवरी) को फोर्स की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई कर अवैध रास्ते को हटाया गया।
10 किलोमीटर बचाने के लिए बना लिया निजी रास्ता
जानकारी के मुताबिक, ईंट-भट्टा ठेकेदार नीलकंठ पांडे ने अपने कारोबार के लिए कच्चा माल लाने-ले जाने हेतु शिवनाथ नदी के ऊपर मिट्टी और पाइप डालकर अस्थायी पुल (Durg River Encroachment) बना लिया था। जबकि उसी क्षेत्र में पहले से ही वैध पुल और एनीकट मौजूद हैं। गांव के सरपंचों का कहना है कि ठेकेदार ने केवल करीब 10 किलोमीटर की दूरी बचाने और परिवहन लागत कम करने के लिए यह अवैध निर्माण कराया।
कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने किया विरोध
सोमवार को जब प्रशासन ने अवैध एनीकट हटाने की कार्रवाई शुरू की, तब मौके पर दो थानों की पुलिस फोर्स तैनात रही। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने विरोध शुरू कर दिया और नदी में पहुंचे जेसीबी को भी बंद करवा दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को दोबारा बुलाया गया, जिसके बाद तहसीलदार की मौजूदगी में जेसीबी फिर से चालू कर एक छोर से एनीकट तोड़ने का काम शुरू किया गया।
दो पंचायतों के बीच बहती है नदी, दोनों सरपंच नाराज़
यह अवैध एनीकट पथरिया और रवेलीडीह पंचायत के बीच बहने वाली शिवनाथ नदी (Durg River Encroachment) पर बनाया गया था। पथरिया पंचायत के सरपंच मीत कुमार निषाद ने कहा कि ठेकेदार ने पंचायत से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली और वर्षों से अस्थायी बांध बनाकर लाखों रुपये का फायदा उठा रहा था।
वहीं रवेलीडीह पंचायत के सरपंच माधोलाल देवांगन का आरोप है कि ठेकेदार ने पंचायत की जमीन किराए पर लेकर ईंटों का स्टॉक रखा, लेकिन किराया तक अदा नहीं किया।
30 साल से चल रहा था अवैध कारोबार
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब तीन दशकों से इसी तरह नदी पर मिट्टी का बांध बनाकर ईंट-भट्टे का व्यापार किया जा रहा था। इससे नदी के प्राकृतिक बहाव और सुरक्षा दोनों पर खतरा बना हुआ था।
सिंचाई विभाग ने पहले भी दिया था नोटिस
सिंचाई विभाग के एसडीओ कुलेश्वर जोशी ने बताया कि बिना अनुमति नदी पर पुल बनाना पूरी तरह अवैध है। पिछले वर्ष इस संबंध में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन ठेकेदार ने कोर्ट में मामला दायर कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मिट्टी के इस बांध से कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।
ठेकेदार का दावा- नियमों के तहत बनाया बांध
वहीं ठेकेदार नीलकंठ पांडे का कहना है कि नदी में बांध बनाना नियमों के तहत किया गया और पानी के बहाव को रोकने से बचाने के लिए 10 स्थानों पर पाइप लगाए गए थे। उनका दावा है कि इस रास्ते का उपयोग किसान और ग्रामीण भी करते थे।
कलेक्टर बोले- बिना अनुमति कोई निर्माण नहीं
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि शिवनाथ नदी में मिट्टी डालकर रास्ता बनाना पूरी तरह नियम विरुद्ध है। जल संसाधन विभाग की टीम ने कार्रवाई की है और जो हिस्सा बचा है, उसे भी हटाया जाएगा। किसी भी स्तर पर पुल या एनीकट निर्माण की अनुमति नहीं दी गई थी।





