सीजी भास्कर, 08 जुलाई : प्रदेश में अल-नीनो (El Nino Alert) के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि अल-नीनो का असर बढ़ता है तो मानसून में देरी, बारिश के बीच लंबे अंतराल, कम वर्षा और समय से पहले मानसून समाप्त होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं, जिससे खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए राज्य में विशेष आकस्मिक कार्ययोजना लागू की गई है।
कृषि विभाग के अनुसार इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देना, कम पानी वाली फसलों को अपनाना, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना है। किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली धान की उन्नत किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।
कम पानी वाली फसलों पर दें जोर
विभाग ने सलाह दी है कि टिकरा और भर्री जैसी ऊंची एवं ढलान वाली भूमि में समय पर बुआई के साथ डायरेक्ट सीडेड राइस (Direct Seeded Rice-DSR) तकनीक अपनाई जाए। इससे नमी संरक्षण बेहतर होगा और पानी की खपत भी कम होगी।
किसानों से केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाने की अपील की गई है। विभाग ने अरहर, मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलों तथा तिल, सोयाबीन और मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों की खेती को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

जल संरक्षण और मल्चिंग तकनीक अपनाने की अपील
कृषि विभाग ने खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग (Mulching) तकनीक अपनाने, मजबूत मेड़बंदी करने तथा वर्षा जल संरक्षण के पारंपरिक और स्थानीय उपायों को अपनाने पर जोर दिया है। विभाग का कहना है कि इन उपायों से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और वाष्पीकरण कम होने से फसलों को पर्याप्त लाभ मिलता है।
फसल बीमा कराने की भी सलाह
विभाग ने किसानों से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के तहत अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने की अपील की है। साथ ही खेती के दौरान किसी भी तकनीकी या मौसम संबंधी समस्या आने पर नजदीकी कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक मार्गदर्शन लेने की सलाह दी गई है।



