सीजी भास्कर, 08 जुलाई : प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) ने सुकमा जिले की एक आदिवासी महिला की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। कभी जर्जर कच्ची झोपड़ी में रहने वाली हड़मे कवासी आज अपने पक्के घर में सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन बिता रही हैं। सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि बिहान योजना (Bihan Yojana) से जुड़कर उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है।
कभी टपकती थी झोपड़ी, आज पक्के घर में सुरक्षित परिवार
सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड के ग्राम जैमेर निवासी हड़मे कवासी के पति और आत्मसमर्पित नक्सली स्वर्गीय कवासी सोमडू देवा के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। सीमित संसाधनों के कारण परिवार जर्जर कच्ची झोपड़ी में रहने को मजबूर था। बारिश में छत टपकती थी और गर्मी में रहना मुश्किल हो जाता था।
इसी दौरान शासन की प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत उन्हें पक्का मकान स्वीकृत हुआ। आज उनका नया घर पूरी तरह तैयार है, जहां पूरा परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहा है।
शौचालय मिलने से बदली जीवनशैली
पक्के घर के साथ स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के तहत शौचालय का निर्माण भी कराया गया। इससे परिवार को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिला तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आई। अब परिवार को खुले में शौच की परेशानी से भी मुक्ति मिल चुकी है।
बिहान योजना से मिली आत्मनिर्भर बनने की ताकत
सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (National Rural Livelihood Mission) के तहत संचालित बिहान योजना ने भी हड़मे कवासी की जिंदगी को नई दिशा दी। वे रैला पुंगार स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
शासन की योजनाओं से बदली पूरी जिंदगी
हड़मे कवासी बताती हैं कि पहले उनका जीवन अभाव, असुरक्षा और संघर्ष से भरा हुआ था, लेकिन अब उनके पास पक्का घर, शौचालय और आय का स्थायी साधन है। उन्होंने इस बदलाव के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार जताया। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाएं सही पात्र तक पहुंचने पर किस तरह किसी परिवार की जिंदगी बदल सकती हैं।



