सीजी भास्कर, 07 जुलाई : छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने बिजली उपभोक्ताओं (Electricity Tariff) को बड़ी राहत देते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान को बिजली दरों में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक लापरवाही, जोखिम प्रबंधन में कमी या संपत्तियों का बीमा नहीं कराने से हुए नुकसान का भार उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
गोदाम में आग से हुए नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से करने की थी मांग
वित्तीय वर्ष 2026-27 के टैरिफ निर्धारण के दौरान CSPDCL ने कुल 658.32 करोड़ रुपये को असाधारण व्यय के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया था। इसमें अप्रैल 2024 में रायपुर के गुढ़ियारी स्थित क्षेत्रीय गोदाम में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के कारण ट्रांसफार्मर, केबल और अन्य विद्युत उपकरणों को हुए नुकसान के अलावा भिलाई, रायगढ़ और कोरबा में आगजनी की घटनाओं से हुए 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान को बिजली टैरिफ में जोड़ने का प्रस्ताव शामिल था।
बीमा के पर्याप्त दस्तावेज नहीं दे सकी कंपनी
सुनवाई के दौरान आयोग ने कंपनी से पूछा कि जिन सामग्रियों का नुकसान हुआ, उनका बीमा कराया गया था या नहीं। प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग ने पाया कि कंपनी बीमा संबंधी पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सकी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वितरण कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा और उनका बीमा कराना उसकी जिम्मेदारी है। यदि इस स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसका वित्तीय बोझ बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
रेलवे से जुड़े 591.75 करोड़ के दावे पर भी राहत नहीं
आयोग ने रेलवे से जुड़े 591.75 करोड़ रुपये के दावे को भी फिलहाल बिजली टैरिफ में शामिल करने से इनकार कर दिया। आयोग के अनुसार यह मामला अभी आर्बिट्रेशन में लंबित है और अंतिम देनदारी तय नहीं हुई है। ऐसे में इस राशि को भी उपभोक्ताओं से वसूलने का कोई आधार नहीं बनता।
उपभोक्ताओं के हित में अहम फैसला
CSERC के इस फैसले को बिजली उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वितरण कंपनियां अपनी प्रशासनिक कमियों, जोखिम प्रबंधन की विफलता या बीमा संबंधी लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई सीधे उपभोक्ताओं से नहीं कर सकतीं।



