सीजी भास्कर, 07 जुलाई : छत्तीसगढ़ में जुलाई की शुरुआत (Rain Deficit) जोरदार बारिश के साथ हुई है। जून में कमजोर पड़े मानसून की भरपाई जुलाई के पहले सप्ताह की मूसलाधार बारिश ने काफी हद तक कर दी है। 30 जून तक प्रदेश में सामान्य से करीब 67 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई के पहले छह दिनों में हुई तेज वर्षा के बाद यह कमी घटकर केवल 18 प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक भी प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
6 दिनों में सामान्य से 146 प्रतिशत अधिक बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश में 213 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इसमें अकेले 1 से 6 जुलाई के बीच 147 मिमी बारिश हुई, जो इस अवधि के सामान्य औसत से 146 प्रतिशत अधिक है। लगातार बारिश से शिवनाथ, खारुन समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने मजबूत कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी द्रोणिका के कारण प्रदेश में लगातार नमी पहुंच रही है। इसी वजह से अधिकांश जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है।
बलौदाबाजार में सबसे ज्यादा 200 मिमी बारिश
पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक 200 मिमी बारिश बलौदाबाजार में दर्ज की गई। इसके अलावा राजिम में 180 मिमी, लवन में 170 मिमी, गिरौदपुरी टांगर और भाटापारा में 160-160 मिमी वर्षा हुई। बलौदा, गोबरा नवापारा और बिलाईगढ़ में 150-150 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
राजनांदगांव, भटगांव, अकलतरा, पौड़ी उपरोड़ा, तिल्दा, चंद्रपुर और खरोरा में 140-140 मिमी, जबकि पिथौरा, रायगढ़ और सिमगा में 130-130 मिमी वर्षा दर्ज की गई। कई अन्य क्षेत्रों में भी 100 मिमी से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
दो मौसम प्रणालियां सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र और मानसूनी द्रोणिका के प्रभाव से मंगलवार और बुधवार को भी प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है।
मौसम केंद्र रायपुर के अनुसार बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा, मुंगेली और जांजगीर-चांपा में अत्यधिक बारिश हो सकती है। वहीं रायपुर, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, सरगुजा, जशपुर और राजनांदगांव समेत मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी भारी वर्षा का अनुमान है।
खारुन नदी में फिर बढ़ी जलकुंभी की समस्या
लगातार बारिश के बाद राजधानी रायपुर की लाइफलाइन खारुन नदी में जलकुंभी की समस्या फिर गंभीर हो गई है। महादेव घाट से कुम्हारी ब्रिज तक जलकुंभी की मोटी परत दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
हालांकि खारुन नदी के पानी को स्वच्छ रखने के लिए 261 करोड़ रुपये की लागत से तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए गए हैं, लेकिन जलकुंभी हटाने के लिए नियमित व्यवस्था अब भी नहीं हो सकी है।



