सीजी भास्कर, 02 मई : सरगुजा जिले का स्वर्ग कहा जाने वाला मैनपाट इन दिनों हाथियों (Elephant Attack) के खौफ से थर्रा उठा है। शाम ढलते ही यहां मौत का साया मंडराने लगता है और ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। शुक्रवार की दरमियानी रात हाथियों के एक आक्रामक दल ने मैनपाट वन परिक्षेत्र के रिहाइशी इलाकों में घुसकर भारी तबाही मचाई है। हाथियों ने न केवल गरीबों के आशियाने उजाड़ दिए, बल्कि भविष्य गढ़ने वाले शिक्षा के मंदिर को भी निशाना बनाया।
चोरकीपानी में तांडव, बाल-बाल बची जान
हाथियों (Elephant Attack) का एक दल शुक्रवार रात सबसे पहले चोरकीपानी गांव पहुंचा। यहां जंगल की सीमा से सटे एक कच्चे मकान को हाथियों ने अपना निशाना बनाया और उसे तहस-नहस कर दिया। गनीमत यह रही कि हाथी के दस्तक देने से पहले ही घर के सदस्य अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थान पर भाग निकले थे, अन्यथा कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी। ग्रामीणों के अनुसार हाथी बहुत आक्रामक थे और वे घर में रखे अनाज की तलाश कर रहे थे।
स्कूल की खिड़की तोड़ी, किचन शेड किया बर्बाद
चोरकीपानी के बाद गजराजों का यह दल कंडराजा बस्ती की ओर बढ़ा। वहां स्थित प्राथमिक शाला भवन पर हाथियों ने धावा बोल दिया। एक विशालकाय हाथी ने स्कूल की लोहे की मजबूत खिड़की को उखाड़ फेंका और अपनी सूंड अंदर डालकर वहां रखा सामान बाहर फेंक दिया। इतना ही नहीं, स्कूल परिसर में बने किचन शेड को भी हाथियों ने काफी नुकसान पहुंचाया है। स्कूल के भीतर रखे मिड-डे मील के राशन को भी हाथियों ने चट कर दिया।
वन विभाग की चुनौती और ग्रामीणों का डर
मैनपाट और कापू के सीमावर्ती जंगलों में हाथियों के अलग-अलग दल पिछले कई महीनों से डेरा जमाए हुए हैं। इनमें 2-3 हाथियों के छोटे दल और 10-11 हाथियों के बड़े झुंड शामिल हैं। गर्मी बढ़ने के कारण चारा और पानी की तलाश में ये दल आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। वन विभाग की टीम रातभर मुनादी (घोषणा) कर ग्रामीणों को सतर्क कर रही है और उन्हें घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रही है।
कंडराजा कॉलोनी पर फिर मंडराया खतरा
यह क्षेत्र हाथियों (Elephant Attack) के हमले के मामले में काफी संवेदनशील रहा है। पूर्व में हाथियों ने एक पूरी बस्ती को उजाड़ दिया था, जिसके बाद सरकार ने वहां पक्के मकान बनाकर ‘कंडराजा कॉलोनी’ बसाई थी। अब हाथी फिर से उसी कॉलोनी के करीब पहुंच गए हैं, जिससे पुन: विस्थापन और जान-माल के नुकसान का डर सताने लगा है। वन विभाग लगातार हाथियों की लोकेशन ट्रैक कर रहा है।


