सीजी भास्कर, 06 अप्रैल। दिल्ली शराब नीति मामले में आज हाई कोर्ट के भीतर जबरदस्त कानूनी ड्रामा देखने (Excise Policy Case CBI) को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद अपनी दलीलें पेश करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस केस की सुनवाई से अलग होने की मांग की। इस पर सीबीआई (CBI) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ‘अदालत की अवमानना’ करार दिया। कोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को तय की है।
केजरीवाल की मांग: “जज खुद को केस से अलग करें” (Excise Policy Case CBI)
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने पेश होकर अरविंद केजरीवाल ने व्यक्तिगत रूप से बहस की। उन्होंने एक अर्जी दाखिल कर आग्रह किया कि जस्टिस शर्मा आबकारी नीति से जुड़े इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें। केजरीवाल ने कहा कि वह अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं और चाहते हैं कि उनकी इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लिया जाए। कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए इसे रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है।
CBI का पलटवार: “आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक”
सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की इस मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अदालत ‘थिएट्रिक्स’ (नाटक) के लिए (Excise Policy Case CBI) नहीं है। मेहता ने आरोप लगाया कि कुछ लोग संस्थानों पर आरोप लगाकर ही अपना करियर बनाते हैं। उन्होंने केजरीवाल के खुद बहस करने पर तंज कसते हुए कहा, “अगर उन्हें खुद ही बहस का इतना शौक है, तो वह हर सुनवाई में अपने वकीलों को हटा दें और खुद ही जिरह करें।” सीबीआई ने केजरीवाल के इस कदम को अदालत की गरिमा गिराने वाला बताया।
हाई कोर्ट की सख्त चेतावनी, “जवाब दाखिल करें वरना अधिकार खत्म”
सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने उन पूर्व आरोपियों को कड़ी चेतावनी दी, जिन्होंने अब तक सीबीआई की याचिका पर अपना जवाब दाखिल (Excise Policy Case CBI) नहीं किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर आज भी जवाब दे दिया जाए तो स्वीकार होगा, वरना उनके जवाब देने का अधिकार हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा। अदालत ने केजरीवाल की नई याचिका पर सीबीआई को नोटिस भी जारी किया है।
13 अप्रैल को होगी अगली बड़ी जंग
दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली तारीख 13 अप्रैल (सोमवार) दोपहर 2:30 बजे तय की है। सीबीआई ने कोर्ट में बार-बार दोहराया कि यह देश की राजधानी से जुड़ा एक बेहद गंभीर भ्रष्टाचार का मामला है और इस तरह के ‘पॉलिटिकल दांवपेचों’ से कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। अब सबकी नजरें अगले सोमवार पर टिकी हैं कि क्या जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस केस की सुनवाई जारी रखेंगी या नहीं।


