सीजी भास्कर, 07 जनवरी। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स के नेत्र रोग विभाग ने एक बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में चार मरीजों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण कर उनकी आंखों की रोशनी (Eye Donation India) लौटाई गई है। यह सभी मरीज धान की कटाई के दौरान आंखों में लगी चोट के बाद गंभीर संक्रमण, यानी फंगल कॉर्नियल अल्सर से पीड़ित थे। समय पर उपचार और टीम वर्क की बदौलत आज इन मरीजों की जिंदगी में फिर से उजाला लौट आया है।
धान की कटाई बनी अंधेपन की वजह
सिम्स में भर्ती हुए चारों मरीज—दो महिलाएं और दो पुरुष—की उम्र 35 से 50 वर्ष के बीच है और सभी बिलासपुर जिले (Eye Donation India) के निवासी हैं। खेतों में धान की कटाई के दौरान बाली या पत्तियों से आंखों में चोट लगने के बाद संक्रमण इतना बढ़ गया कि आंखों की पुतली पूरी तरह सफेद हो गई। असहनीय दर्द और लगातार बिगड़ती स्थिति के चलते आंख निकालने तक की नौबत आ गई थी।
डॉक्टरों की टीम ने टाला बड़ा खतरा
नेत्र रोग विभाग की प्रमुख डॉ. सुचिता सिंह और डॉ. प्रभा सोनवानी के नेतृत्व में पहले मरीजों का गहन इलाज कर संक्रमण पर काबू पाया गया। इसके बाद आई बैंक से प्राप्त नेत्रदान की सहायता से कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।
आई बैंक और नेत्रदान बना उम्मीद की किरण
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता को डॉक्टरों और स्टाफ के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान में आधुनिक तकनीक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया (Eye Donation India) जा रहा है। समाज में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता की वजह से आज जरूरतमंदों को समय पर कॉर्निया उपलब्ध हो पा रहा है।
वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स में कॉर्निया प्रत्यारोपण जैसे जटिल ऑपरेशन का सफल होना संस्थान की क्षमता और भरोसे को दर्शाता है।
डॉक्टरों की सलाह: सावधानी बेहद जरूरी
डॉ. सुचिता सिंह ने बताया कि चोट, संक्रमण और कुपोषण के कारण बड़ी संख्या में लोग कॉर्नियल अंधत्व का शिकार हो जाते हैं, जहां प्रत्यारोपण ही एकमात्र उपाय बचता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि धान की कटाई और मिसाई के दौरान आंखों की सुरक्षा जरूर करें।
आंख में चोट लगने पर खुद से दवा डालने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही आंख की रोशनी छीन सकती है।
टीम वर्क से मिली सफलता
इस पूरे ऑपरेशन में डॉ. प्रभा सोनवानी के साथ पीजी स्टूडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। चिकित्सकों ने नेत्रदान को मानवता का सबसे बड़ा दान बताते हुए लोगों से आगे आकर इसमें भाग लेने की अपील की है।





