सीजी भास्कर, 20 दिसंबर | Fake Medicine Raid Raipur FDA: छत्तीसगढ़ के सारंगढ़–बिलाईगढ़ इलाके में दवा कारोबार की आड़ में चल रहे बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने सरस्वती मेडिकल स्टोर से जुड़े कारोबारी खेमराज बानी के घर पर दबिश दी, जहां तीन अलग-अलग कमरों से करीब 200 कार्टून एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां बरामद की गईं। जब्त स्टॉक की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपए आंकी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
(FDA Drug Seizure) ट्रक में भरकर ले जानी पड़ी जब्त दवाइयां
छापेमारी के दौरान दवाओं की मात्रा इतनी अधिक थी कि उन्हें एक-एक कर नहीं, बल्कि ट्रक में भरकर ले जाना पड़ा। अधिकारी बताते हैं कि इन दवाओं को घर के भीतर बेहद योजनाबद्ध तरीके से छिपाया गया था, ताकि बाहर से किसी को अंदाजा न लगे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि स्टॉक लंबे समय से यहां जमा किया जा रहा था।
(Illegal Medicine Stock) पहले छापे में दिखी थी सिर्फ औपचारिक कार्रवाई
मामले की परतें तब खुलीं जब 16 दिसंबर को हुई पहली कार्रवाई पर सवाल उठे। उस दिन मेडिकल स्टोर और घर से महज 2.24 लाख रुपए की दवाइयों की जब्ती दिखाई गई थी। बाद में जानकारी मिली कि उसी वक्त घर में कहीं ज्यादा दवाइयां मौजूद थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया। इसी चूक ने दोबारा बड़ी कार्रवाई की जमीन तैयार की।
बेटे के मोबाइल से निकला सबसे अहम सुराग
जांच टीम ने कारोबारी के बेटे का मोबाइल खंगाला तो तस्वीरें और ट्रांसपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड हाथ लगे। मोबाइल में नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट से जुड़ी खेपों की तस्वीरें मिलीं, जो पहले पकड़ी गई नकली दवाइयों से मेल खाती थीं। यहीं से जांच का रुख बदला और टीम सीधे घर के भीतर छिपे स्टॉक तक पहुंची।
(Fake Medicine Raid Raipur FDA) इंदौर–नागपुर कनेक्शन की जांच
प्रारंभिक जांच में दवाइयों के तार इंदौर और नागपुर से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जब्त स्टॉक में से कुछ दवाओं के सैंपल लैब जांच के लिए भेज दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दवाइयां नकली हैं या मानकों के विपरीत तैयार की गई हैं। जांच के दायरे में कारोबारी से जुड़े अन्य लोग भी आ सकते हैं।
अधिकारी बोले—जेनेरिक दवाइयों की भरमार
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जब्त दवाइयों में बड़ी संख्या जेनेरिक मेडिसिन की है, जिनका रोजमर्रा के इलाज में व्यापक इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ जाता है।
पहले की कार्रवाई पर भी लटकी जांच की तलवार
इस पूरे प्रकरण के बाद 16 दिसंबर की शुरुआती कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लापरवाही और कथित मिलीभगत के आरोपों को लेकर विभागीय जांच शुरू होने की बात कही जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।





