सीजी भास्कर, 30 अगस्त : दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद रहे, लेकिन तलाक की स्थिति न बनी हो, तो पति की मृत्यु के बाद पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता (Family Pension Case)।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने यह आदेश उस महिला की याचिका पर दिया, जिसके पति का 2009 में निधन हुआ था। महिला ने 2013 में केंद्र सरकार से पारिवारिक पेंशन की मांग की थी। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय तो दिया, लेकिन पेंशन की राशि 2014 से मंजूर की।
सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि मृतक ने अपनी पारिवारिक सूची में पत्नी का नाम शामिल नहीं किया था और दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। जबकि महिला ने अदालत के समक्ष कहा कि वह कानूनी रूप से पत्नी है और पेंशन का कोई अन्य दावेदार मौजूद नहीं है, इसलिए उसका अधिकार छीना नहीं जा सकता (Family Pension Case)।
पीठ ने यह भी कहा कि पेंशन आवेदन में देरी होना या पति की मृत्यु की जानकारी समय पर न होना, पत्नी के संवैधानिक अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता। अदालत ने साफ किया कि याचिकाकर्ता ने मृतक से भरण-पोषण की मांग की थी, जो यह दर्शाता है कि उनका विवाह वैध था और केवल विवाद की स्थिति बनी हुई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का आदेश निरस्त करते हुए कहा कि महिला को पेंशन पति की मृत्यु तिथि यानी 2009 से ही मिलनी चाहिए (Family Pension Case)। साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया कि चार माह के भीतर ब्याज सहित बकाया राशि का भुगतान किया जाए।