सीजी भास्कर, 07 जुलाई : खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन (Fertilizer Distribution) ने सख्ती शुरू कर दी है। बेमेतरा जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था में अनियमितता पाए जाने पर ग्राम रनबोड़ स्थित मेसर्स महालक्ष्मी कृषि केंद्र के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। कृषि विभाग ने प्रतिष्ठान का उर्वरक लाइसेंस 15 दिनों के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबन अवधि के दौरान महालक्ष्मी कृषि केंद्र में किसी भी प्रकार के उर्वरक का भंडारण, विक्रय या उर्वरक व्यवसाय से संबंधित गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उर्वरक वितरण में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद चला अभियान Fertilizer Distribution
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ फसल के सीजन को देखते हुए जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संचालनालय कृषि, छत्तीसगढ़ के निर्देश पर जिलेभर में उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अधिक कीमत पर बिक्री, अनधिकृत बिक्री, डायवर्सन तथा नकली एवं अमानक उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगाना है। इसी क्रम में 30 जून को नवागढ़ विकासखंड के ग्राम रनबोड़ स्थित मेसर्स महालक्ष्मी कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान प्रतिष्ठान में उर्वरक नियमों से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
कैश मेमो और बिक्री रिकॉर्ड में मिली खामियां
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि उर्वरक बिक्री प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। जांच में कैश मेमो पर किसानों के हस्ताक्षर नहीं मिले।
इसके अलावा प्रतिष्ठान में रखे जाने वाले आवश्यक रिकॉर्ड भी व्यवस्थित नहीं पाए गए। अधिकारियों के अनुसार भंडारण एवं विक्रय पंजी का संधारण अपूर्ण था। निर्धारित प्रारूप में मासिक जानकारी विभाग को उपलब्ध नहीं कराई गई थी। बिक्री स्थल पर उर्वरकों का स्टॉक और निर्धारित विक्रय दर प्रदर्शित नहीं की गई थी। उर्वरक बिक्री से संबंधित दस्तावेजों में भी कई कमियां पाई गईं। कृषि विभाग ने बताया कि उर्वरक नियंत्रण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विक्रेताओं को सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
अन्य जिलों के किसानों को बिक्री और स्टॉक में अंतर मिला
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रतिष्ठान द्वारा बड़ी संख्या में अन्य जिलों के किसानों को उर्वरक की बिक्री की गई थी। इसके अलावा पीओएस मशीन में दर्ज उर्वरक स्टॉक और मौके पर उपलब्ध वास्तविक भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
नोटिस के बाद नहीं मिला संतोषजनक जवाब
अनियमितताओं को लेकर कृषि विभाग ने महालक्ष्मी कृषि केंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। विभाग ने प्रतिष्ठान संचालक से तीन दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। विभाग के अनुसार संचालक द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद उर्वरक निरीक्षक और सह प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी नवागढ़ की अनुशंसा पर प्राधिकृत अधिकारी एवं उप संचालक कृषि, बेमेतरा ने कार्रवाई करते हुए उर्वरक प्राधिकार पत्र को 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया।
किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सख्ती जारी
जिला प्रशासन ने कहा है कि किसानों को समय पर खाद और उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाजार में पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए जिले में उर्वरक विक्रेताओं की जांच लगातार जारी रहेगी। प्रशासन ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के सभी नियमों का पालन करें। किसी भी प्रकार की अनियमितता, अधिक कीमत पर बिक्री, स्टॉक छिपाने या गलत तरीके से वितरण करने की स्थिति में संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य पर ही खरीदारी करें और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की जानकारी तत्काल कृषि विभाग या संबंधित अधिकारियों को दें।



