सीजी भास्कर, 18 मार्च। 8वां वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं अब और तेज (Fitment Factor 3 Demand) हो गई हैं। फिटमेंट फैक्टर पर जहां कर्मचारी संगठन 3.0 तक बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, वहीं पेंशनर्स ने एक नया ‘हाइब्रिड फॉर्मूला’ पेश कर बहस को नया मोड़ दे दिया है।
पेंशनर्स ने दिया नया रास्ता – हाइब्रिड मॉडल
रेलवे वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने 14 मार्च 2026 को आयोग के चेयरपर्सन को अपना प्रस्ताव सौंपा है।
इसमें सुझाव दिया गया है कि फिटमेंट फैक्टर तय करने के लिए एक ही फॉर्मूले के बजाय-
डॉ. वॉलेस एकरॉयड फॉर्मूला
7वें वेतन आयोग का दृष्टिकोण
5वें वेतन आयोग का कॉन्स्टेंट रिलेटिव इनकम मॉडल
को मिलाकर एक संतुलित ‘हाइब्रिड सिस्टम’ अपनाया जाए।
महंगाई और नई जरूरतों को शामिल करने की मांग
प्रस्ताव में कहा गया है कि फिटमेंट फैक्टर केवल पारंपरिक खर्चों पर आधारित नहीं होना चाहिए।
इसमें शामिल किए जाएं-
रोजमर्रा के खर्च
इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम
स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती महंगाई
साथ ही 4 सदस्यों वाले परिवार को आधार मानने की सिफारिश की गई है।
फिटमेंट फैक्टर पर अलग-अलग दावे
जहां कुछ कर्मचारी संगठन 3.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, वहीं पहले के अनुमानों में यह 1.82 से 2.46 के बीच रहने की संभावना जताई गई थी। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की रिपोर्ट और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है, जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। यानी यही तय करता है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी।
2027 तक आ सकती है रिपोर्ट, एरियर्स पर भी नजर
फिलहाल आयोग डेटा कलेक्शन और बैठकों के दौर में है।
रिपोर्ट आने की संभावना: 2027
लागू होने की उम्मीद: 2027
एरियर्स: 1 जनवरी 2026 से मिलने की संभावना
सरकार वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।
अब क्या होगा आगे?
फिटमेंट फैक्टर पर बढ़ती मांग और नए सुझावों के बीच अब सबकी नजर आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है। अगर यूनियनों का दबाव बढ़ा, तो बड़ा वेतन बढ़ोतरी संभव है, लेकिन सरकार के लिए वित्तीय संतुलन भी एक बड़ी चुनौती रहेगा।





