सीजी भास्कर, 25 जुलाई |
बस्तर/बीजापुर – छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। पहली बार स्पेशल ज़ोनल कमेटी (SZCM) जैसे उच्च स्तर के कैडर से जुड़े नक्सली ने खुद को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। अब तक ये बड़े नक्सली तेलंगाना में जाकर सरेंडर करते थे, लेकिन इस बार यह सिलसिला बदला।
बीजापुर जिले के रहने वाले 25 लाख के इनामी नक्सली रामन्ना इरपा उर्फ जगदीश उर्फ विकेश ने हथियार डाल दिए। यह नक्सली 2002 से सक्रिय था और ओडिशा राज्य कमेटी सदस्य, कंपनी नंबर-8 का इंचार्ज, ईस्ट जोनल ब्यूरो का कमांडर इन चीफ जैसे पदों पर रह चुका है।
छोटी उम्र में बना नक्सली, अब विचारधारा पर उठाया सवाल
रामन्ना ने आत्मसमर्पण के बाद कहा,
“कम उम्र में नक्सली संगठन में शामिल हुआ था क्योंकि उस समय उनकी बातों में सच्चाई लगती थी – जल, जंगल, जमीन की लड़ाई। लेकिन अब संगठन की सोच बदल गई है, दोहरा रवैया अपना लिया है। अब हम विकास चाहते हैं, न कि हिंसा। इसलिए आत्मसमर्पण किया।”
बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण, कई जिलों में एक साथ 66 नक्सलियों ने छोड़ा नक्सलवाद
बस्तर संभाग के पांच जिलों में एक ही दिन कुल 66 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इन सभी पर कुल 2 करोड़ 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था। जिलेवार आंकड़ा इस प्रकार है:
- बीजापुर: 25 नक्सली (23 पर ₹1.15 करोड़ का इनाम)
- कांकेर: 13 नक्सली (₹62 लाख का इनाम)
- नारायणपुर: 8 नक्सली (₹33 लाख का इनाम)
- दंतेवाड़ा: 16 नक्सली (5 पर ₹17 लाख का इनाम)
- सुकमा: 5 नक्सली (सभी इनामी)
इनमें कई बड़े पदों पर रहने वाले नक्सली शामिल हैं, जैसे कि मिलिट्री कंपनी नंबर 1 का कमांडर, DVCM, और ACM रैंक के सदस्य।
“पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान से मिली सफलता
बस्तर में पुलिस ने हाल ही में “पुनर्वास से पुनर्जीवन” (Poona Maargem) नामक एक नई रणनीति शुरू की है, जिसके तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी का असर रहा कि एक साथ इतने इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
बस्तर रेंज के IG सुंदरराज पी ने कहा:
“यह नक्सली नेटवर्क पर गहरी चोट है। इतने बड़े कैडर्स का सरेंडर बताता है कि हमारी रणनीति सही दिशा में जा रही है। हम अन्य नक्सलियों से भी अपील करते हैं कि हथियार छोड़कर शांति और विकास की राह चुनें। सरकार की योजनाएं उनके पुनर्वास के लिए तैयार हैं।”





