सीजी भास्कर, 24 सितंबर। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से एक चिंताजनक खबर (Forest Menace) सामने आई है जहां माओवादी समूहों ने सुरक्षा बलों के लिए एक नया जाल बिछाया। सोमवार को इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के आसपास तलाशी के दौरान सुरक्षा जवानों को ऐसे पांच उपकरण मिले, जिनमें से दो विशेष प्रकार के थे — और जिन्हें मौके पर निष्क्रिय कर दिया गया।
हादसे की जगह पर मौजूद सुरक्षा स्रोतों का कहना है कि ये उपकरण दिखने में साधारण थे, मगर इनके कारण गंभीर चोटें और घातक परिणाम सम्भव थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि कांच के बिखरने से और रासायनिक जलन से घायल होने का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए इन्हें सामान्य अवशेष की तरह समझकर हाथ लगाने से बचना चाहिए।
सीआरपीएफ, डीआरजी और विस्फोटक निरोधक दस्ते की संयुक्त टीम ने घटनास्थल पर पहुँच कर तुरंत कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, पहले भी सुकमा और बीजापुर (Forest Menace) जिलों में इसी तरह के उपकरण मिले थे — और यही वजह है कि फिल्ड यूनिट सतर्कता बरत रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि जंगल में बिखरे कांच और अन्य अवशेष खतरनाक साक्ष्य बन सकते हैं, इसलिए स्थानीय यात्रियों और पर्यटकों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, “हम केवल उपकरण बरामद नहीं कर रहे, बल्कि किसी भी संभावित घातक चाल को असफल बना रहे हैं। एक भी जवान का हताहत होना पूरे ऑपरेशन की प्राथमिकता बदल देता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुरक्षा बलों की त्वरित पहचान और निष्क्रिय करने की क्षमता ही कई बार बड़े नुक्सान को टाल देती है।
स्थानीय निवासियों और वनरक्षकों ने भी हाल के दिनों में संदिग्ध वस्तुओं की बढ़ती संख्या की जानकारी दी है। वन विभाग ने इससे जुड़े जोखिमों और संभावित पर्यावरणीय व मानवीय प्रभावों (Forest Menace) पर भी चिंता जताई है – ख़ासकर तब जब कांच के टुकड़े जंगली जानवरों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बनते हैं।
पुलिस ने आग्रह किया है कि कोई भी मिले-जुले कांच या संदिग्ध चीज़ को छुएं नहीं और तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या हेल्पलाइन पर सूचना दें। साथ ही, क्षेत्रीय यातायात और पैदल मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि ऐसे खतरों को पहले ही पकड़ा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि विद्रोही समूह लड़ाकू रणनीतियों को बदलते रहते हैं और सुरक्षा बलों को भी उसी तरह से कदम उठाने पड़ते हैं – इससे न केवल सुरक्षा बलों की सतर्कता जरूरी बनती है बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही मायने रखती है।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में तैनात सुरक्षा यूनिट अब भी इलाके में पेट्रोलिंग और क्लीन-अप ऑपरेशन कर रहे हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और इलाके में सामान्य लोगों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।





