सीजी भास्कर, 19 जनवरी। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान (Form-6) के तहत बिलासपुर जिले में मतदाता सूची से नाम कटने के मामलों ने प्रशासन और आम मतदाताओं, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में अब तक करीब 3.60 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, जिसके बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 22 जनवरी तक नाम कटने से संबंधित दावा और आपत्तियां स्वीकार की जा रही हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मतदान अधिकार से वंचित न रहे।
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची (Form-6) से हट गए हैं, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे सभी मामलों में (Form-6) के माध्यम से पुनः नाम जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और निर्वाचन कर्मियों की तैनाती की गई है, जो मौके पर ही आवेदन स्वीकार कर रहे हैं और प्राथमिक स्तर पर सुनवाई भी कर रहे हैं। इससे ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं को राहत मिली है।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, एसआईआर के दौरान सूची का सत्यापन करते समय कई नाम तकनीकी कारणों, अपूर्ण जानकारी या लंबे समय से मतदान न करने के आधार पर हटाए गए हैं। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मतदाता पात्र है और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो (Form-6) के जरिए उसका नाम दोबारा जोड़ा जाएगा। इसी उद्देश्य से दावा-आपत्ति प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी रखा गया है।
नाम जोड़ने के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाताओं से पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। इसमें वर्ष 2003 की पुरानी मतदाता सूची में किसी परिजन का नाम, 8वीं या 10वीं कक्षा की मार्कशीट, और आधार कार्ड की छायाप्रति प्रमुख रूप से शामिल है। कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की कतार देखी जा रही है। लोग अपने दस्तावेजों के साथ समय रहते आवेदन करने पहुंच रहे हैं, ताकि अंतिम तिथि से पहले (Form-6) जमा कर उनका नाम सूची में शामिल हो सके।
(Form-6) मतदान अधिकार छिन जाने का डर
ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोग दावा-आपत्ति दर्ज कराने पहुंच रहे हैं। कई मतदाताओं का कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के उनके नाम मतदाता सूची से कटे होने की जानकारी मिली, जिससे मतदान अधिकार छिन जाने का डर सताने लगा। कुछ बुजुर्ग मतदाताओं ने बताया कि वे वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार सूची में नाम न देखकर वे असमंजस में पड़ गए।
वहीं निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, एसआईआर का उद्देश्य अपात्र नाम हटाना है, न कि पात्र मतदाताओं को वंचित करना। यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो (Form-6) भरकर वह आसानी से अपना नाम पुनः जुड़वा सकता है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि सभी बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे हर आवेदन को गंभीरता से लें और समयबद्ध तरीके से उसका निपटारा करें।
प्रशासन की ओर से मतदाताओं (Form-6) से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और समय रहते अपने मतदान केंद्र पर पहुंचकर स्थिति की जांच करें। जिनका नाम सूची में नहीं है, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ (Form-6) भरें, ताकि उनका संवैधानिक मतदान अधिकार सुरक्षित रह सके। निर्वाचन विभाग का दावा है कि पात्र मतदाताओं का नाम हर हाल में जोड़ा जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।




