सीजी भास्कर 29 अगस्त
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए की है। पटेल वही अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने भारत की मौद्रिक नीति में इन्फ्लेशन-टार्गेटिंग फ्रेमवर्क लागू करने में अहम योगदान दिया था।
अचानक बदला गया भारत का प्रतिनिधित्व
IMF में यह नियुक्ति तब हुई है, जब सरकार ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए 30 अप्रैल को आदेश जारी कर मौजूदा ED कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यन का कार्यकाल समय से छह महीने पहले ही समाप्त कर दिया। इसके बाद उर्जित पटेल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
RBI से IMF तक का सफर
डॉ. उर्जित पटेल ने 2016 में रघुराम राजन के बाद RBI के 24वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाला था। हालांकि, दिसंबर 2018 में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया। वे 1992 के बाद से सबसे कम कार्यकाल वाले गवर्नर भी रहे।
अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IMF में उनकी भूमिका भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी।
पाकिस्तान को IMF पैकेज पर भारत की चिंता
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब IMF ने हाल ही में पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर के मल्टी-ईयर पैकेज का हिस्सा बताते हुए 1 अरब डॉलर का लोन मंजूर किया है।
भारत लंबे समय से इस बात पर आपत्ति जताता रहा है कि पाकिस्तान IMF की मदद का उपयोग आतंकवाद और सीमा पर अस्थिरता फैलाने के लिए करता है।
ऐसे में IMF में भारत के प्रतिनिधि के तौर पर पटेल की नियुक्ति रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
गीता गोपीनाथ का कार्यकाल खत्म
इसी बीच IMF की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का 7 साल का कार्यकाल भी पूरा हो गया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर विदाई संदेश देते हुए कहा कि IMF में काम करना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा।