छत्तीसगढ़ में अगला विधानसभा चुनाव अभी करीब ढाई साल दूर है, लेकिन कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू को मुख्यमंत्री बनने योग्य नेताओं में शामिल बताया है।
खास बात यह है कि ये वही चार नाम हैं, जो 2018 में कांग्रेस की सत्ता वापसी के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। उस समय पार्टी ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया था। करीब आठ साल बाद एक बार फिर इन्हीं चार वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं, हालांकि अब चारों की राजनीतिक स्थिति पहले से अलग है।
भूपेश बघेल के पास मुख्यमंत्री पद का अनुभव
भूपेश बघेल 2018 से 2023 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे। इससे पहले उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर संगठन की कमान संभाली थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी।
बघेल पाटन विधानसभा सीट से लगातार सक्रिय रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पाटन से जीत दर्ज की थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में राजनांदगांव सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में उनके राजनीतिक प्रोफाइल में मुख्यमंत्री के रूप में सरकार चलाने और संगठन संभालने का अनुभव, दोनों शामिल हैं।
चरणदास महंत की मौजूदा भूमिका अलग
चरणदास महंत वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सक्ती सीट से जीत दर्ज की थी। महंत का राजनीतिक अनुभव राज्य की राजनीति के साथ केंद्र तक भी रहा है। वह विधायक, मंत्री, लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
इसके अलावा वह 2019 से 2023 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में उनकी प्रमुख भूमिका विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व करने की है। कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ विधानसभा में उठाए जाने वाले मुद्दों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
टीएस सिंहदेव के नाम के साथ मंत्री और डिप्टी CM का अनुभव
टीएस सिंहदेव 2018 में भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। जून 2023 में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था।
हालांकि 2023 का विधानसभा चुनाव उनके लिए अहम राजनीतिक मोड़ रहा। अंबिकापुर सीट से उन्हें भाजपा उम्मीदवार राजेश अग्रवाल के हाथों हार मिली। सिंहदेव लंबे समय तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे थे। उनके राजनीतिक सफर में सरकार में मंत्री और उपमुख्यमंत्री के अनुभव के साथ 2023 का चुनावी परिणाम भी महत्वपूर्ण तथ्य है।
ताम्रध्वज साहू के पास सांसद और मंत्री का अनुभव
ताम्रध्वज साहू भी 2018 में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। उस समय वह लोकसभा सांसद थे और कांग्रेस के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिने जाते थे। राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें गृह सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली।
2023 के विधानसभा चुनाव में वह दुर्ग ग्रामीण सीट से भाजपा के ललित चंद्राकर से हार गए। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने महासमुंद सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा उम्मीदवार रूपकुमारी चौधरी से हार गए। इस तरह उनके राजनीतिक अनुभव में सांसद और मंत्री के पद शामिल हैं, जबकि हाल के चुनावी नतीजे भी उनके वर्तमान राजनीतिक प्रोफाइल का हिस्सा हैं।
2018 के चार नाम, लेकिन बदली राजनीतिक परिस्थितियां
2018 में इन चारों नेताओं के नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में थे। उस समय कांग्रेस को 15 साल बाद सत्ता मिली थी और पार्टी नेतृत्व के सामने मुख्यमंत्री का चयन करने का सवाल था। अब करीब आठ साल बाद वही चार चेहरे फिर चर्चा में हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएं बदल चुकी हैं।
भूपेश बघेल मुख्यमंत्री रह चुके हैं, चरणदास महंत नेता प्रतिपक्ष हैं, टीएस सिंहदेव उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और ताम्रध्वज साहू राज्य सरकार में गृह जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं। साथ ही चारों के हालिया चुनावी प्रदर्शन भी अलग-अलग रहे हैं।
नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की नीति भी चर्चा में
कांग्रेस ने संगठन में 50 साल से कम उम्र के नेताओं को आगे बढ़ाने की नीति पर भी जोर दिया है। 2022 के उदयपुर चिंतन शिविर में संगठन के विभिन्न स्तरों पर 50 प्रतिशत पदों पर 50 साल से कम उम्र के नेताओं को जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी। 2023 के रायपुर अधिवेशन में भी इस दिशा में जोर दिया गया।
हालांकि यह फॉर्मूला मुख्यमंत्री पद के चयन का सीधा नियम नहीं है। मुख्यमंत्री का चयन होने की स्थिति में चुनावी प्रदर्शन, विधायक दल का समर्थन, संगठन में भूमिका, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण समेत कई राजनीतिक पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।
फिलहाल 2028 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है। ऐसे में इन चार नेताओं के नामों की चर्चा को मुख्यमंत्री पद के अंतिम दावेदारों की सूची नहीं माना जा सकता। प्रदेश कांग्रेस में सामने आए बयान ने इतना जरूर स्पष्ट किया है कि पार्टी के पुराने वरिष्ठ चेहरों के साथ नई पीढ़ी के नेताओं की भूमिका भी आने वाले समय में चर्चा का विषय बनी रहेगी।



