सीजी भास्कर 24 अप्रैल
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बिजली विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर साइबर ठगों ने करीब 36.97 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को फर्जी IPS और CBI अधिकारी बताकर पीड़ित को झांसे में लिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने राजस्थान से एक महिला सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी को बनाया निशाना
जानकारी के अनुसार, केसर परिसर निवासी 66 वर्षीय नरेन्द्र ठाकुर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी में परिवेक्षक पद से जनवरी 2022 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 17 फरवरी 2026 को साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथ 36,97,117 रुपये की ठगी हुई है।
फर्जी कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल
पीड़ित ने बताया कि 14 जनवरी 2026 को उन्हें एक अज्ञात महिला का कॉल आया, जिसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी से जुड़ा अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके पहचान पत्र का इस्तेमाल कर एक मोबाइल नंबर से गलत गतिविधियां की जा रही हैं। इसके बाद कॉल को कथित टेलीकॉम अधिकारी और दिल्ली के बाराखंबा रोड थाना के फर्जी पुलिस अधिकारी से जोड़ा गया।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर धमकाया
आरोपियों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को IPS अधिकारी “नीरज ठाकुर” बताया और डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया। इसके बाद पीड़ित को जांच में सहयोग के नाम पर लगातार दबाव में रखा गया।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई रकम
ठगों ने पीड़ित से बैंक खाते, संपत्ति और वित्तीय जानकारी लेकर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद राशि लौटा दी जाएगी। डर के कारण पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच कुल 36.97 लाख रुपये विभिन्न खातों में जमा कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर ठगी का खुलासा हुआ।
तकनीकी जांच से राजस्थान तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान साइबर थाना ने बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर रकम के ट्रांजैक्शन को ट्रेस किया। इसमें सामने आया कि करीब 4.50 लाख रुपये राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित खातों में जमा हुए थे। इसके आधार पर पुलिस टीम को राजस्थान भेजा गया।
बैंक कर्मचारी समेत 5 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस टीम ने भीलवाड़ा में दबिश देकर बंधन बैंक के कर्मचारी राहुल व्यास को हिरासत में लिया। पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने रविराज सिंह, उसकी पत्नी आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर रायगढ़ लाया।
साइबर ठगी का नेटवर्क ऐसे बना
पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों के खातों में पहले संदिग्ध रकम आनी शुरू हुई थी। इसके बाद उन्होंने ठगों से संपर्क कर खुद इस गिरोह से जुड़ने का फैसला किया। उन्होंने अपने बैंक खाते साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराए और ऑनलाइन माध्यम से ठगी के तरीके सीखे।
करोड़ों की ठगी का खुलासा
जांच में आरोपियों के मोबाइल से कॉल रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप चैट मिले हैं, जिनसे ठगी की पुष्टि हुई है। गौरव व्यास के खाते में करीब 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं। अब तक की जांच में गिरोह द्वारा देशभर में करीब 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने की बात सामने आई है। पुलिस ने सभी खातों को सीज कर 7 मोबाइल और एक लैपटॉप जब्त किया है।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लोगों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी CBI, पुलिस या टेलीकॉम अधिकारी बनकर आने वाले कॉल से सावधान रहें। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती। ऐसे मामलों में घबराएं नहीं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें।


