सीजी भास्कर, 11 जनवरी। गरियाबंद जिले के उरमाल गांव में आयोजित एक मनोरंजन कार्यक्रम अब प्रशासनिक और पुलिस महकमे के लिए असहज स्थिति (Gariaband Obscene Dance Case) बनता जा रहा है।
छह दिनों तक चले ओपेरा आयोजन के दौरान महिलाओं द्वारा कथित रूप से अश्लील डांस किए जाने और मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान अर्धनग्न अवस्था में डांस किए गए और मंच के सामने मौजूद दर्शकों के बीच आपत्तिजनक हरकतें हुईं। वायरल वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि आयोजन स्थल पर मैनपुर के एसडीएम तुलसी दास मौजूद थे और कथित तौर पर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए। वहीं, दो पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनके आचरण को अनुशासनहीन बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार 29 दिसंबर 2025 को उरमाल गांव की युवा समिति ने छह दिवसीय मनोरंजन कार्यक्रम की अनुमति ली थी। इसके तहत ओडिशा के कटक से एक ओपेरा ग्रुप को आमंत्रित (Gariaband Obscene Dance Case) किया गया था।
8, 9 और 10 जनवरी को आयोजित प्रस्तुतियों के दौरान मंच पर बार डांस की शैली में कार्यक्रम हुए, जिनकी टिकट दर 200 से 400 रुपये तक तय की गई थी। सूत्रों के मुताबिक कलाकारों को प्रतिदिन करीब 60 हजार रुपये का भुगतान किया गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। वहीं देवभोग थाना में आयोजन से जुड़े चार लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की और बाद में मुचलके पर रिहा कर दिया।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक लापरवाही (Gariaband Obscene Dance Case) बताते हुए एसडीएम की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आयोजन की अनुमति दी गई थी, तो कार्यक्रम की मर्यादा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी थी।
विवाद बढ़ने के बाद 10 जनवरी को ओपेरा कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


