सीजी भास्कर, 24 मई : ग्राफ्टेड बैंगन की खेती (Grafted Brinjal Farming) पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी साबित हो रही है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक प्राप्त होती है। कठिन परिश्रम, आधुनिक कृषि तकनीक और नवाचार के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान नवीन साव ने पेश किया है।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत खेती को अपनाया। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ
कृषक नवीन साव ने बताया कि वे पहले अपने खेतों (Grafted Brinjal Farming) में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपये तक का लाभ मिल पाता था। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की।
उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति से ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के कारण उन्हें बंपर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त हुआ।
सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग
ग्राफ्टेड बैंगन (Grafted Brinjal Farming) की फसल रोपाई के लगभग 45 से 50 दिनों बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। एक पौधे से करीब 50 किलो तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक माना जा रहा है।

नवीन साव ने अपने उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपये प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्होंने करीब 2 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो धान की खेती की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।
विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता
नवीन साव अपनी सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं से मिले लाभ और आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी लेते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं।

कच्चापाल और बोहारपार सहित आसपास के क्षेत्रों के किसान अब लगातार उनके फार्म का भ्रमण कर आधुनिक तकनीकों को समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक सफलता को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।



