सीजी भास्कर, 30 नवंबर। राज्य में लागू हुई नई गाइडलाइन दरों का असर अब पंजीयन दफ्तरों में सीधे दिखाई देने लगा है। शहरी क्षेत्रों में 20 से 40 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 50 से 500 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के बाद रजिस्ट्री की कुल लागत दो से पांच गुना तक बढ़ चुकी है। जमीन खरीदी-बिक्री महंगी होने से कई पक्षकारों ने अपने सौदे रद कर दिए हैं और पंजीयन कार्यालयों में रजिस्ट्री की संख्या में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। नई दरों ने पंजीयन प्रक्रिया पर भारी आर्थिक दबाव बनाकर (Guide line Rate Hike) को लेकर व्यापक असंतोष पैदा किया है।
राजधानी से लगे गांवों में जहां पहले प्रति हेक्टेयर करीब ढाई लाख रुपये का स्टांप और पंजीयन शुल्क लगता था, वहीं अब यह बढ़कर 11.13 लाख रुपये तक पहुंच गया है। जमीन खरीददारों और रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि नई दरों के कारण प्लॉट, मकान और औद्योगिक भूमि के दामों में अप्रत्याशित उछाल आया है। इससे निर्माण लागत बढ़ने के साथ पूरा रियल एस्टेट बाजार धीमा पड़ गया है। कई खरीदारों ने बताया कि गाइडलाइन दरों में अचानक की गई वृद्धि ने (Guide line Rate Hike) के चलते उनकी बुकिंग और खरीद योजनाओं को प्रभावित कर दिया है।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क पर सीधा प्रभाव
नई दरों के कारण संपत्ति की रजिस्ट्री अब पहले से कहीं अधिक महंगी हो गई है। कई सौदे या तो स्थगित कर दिए गए हैं, या सीधे रद कर दिए गए हैं। खरीदारों का कहना है कि अनियोजित वृद्धि ने बाजार की गति को बाधित कर दिया है।
पुनरीक्षण का कोई प्रस्ताव नहीं
भले ही विरोध तेज हो, लेकिन पंजीयन विभाग का कहना है कि फिलहाल गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण का कोई प्रस्ताव नहीं है। विभाग का तर्क है कि नई दरों से किसानों और भूमिस्वामियों को उनकी जमीन का अधिक और न्यायसंगत मूल्य मिलेगा। साथ ही संपत्ति के विरुद्ध बैंकों से अधिक ऋण लेने में भी यह मददगार होगा। परंतु बाजार में विरोध की आवाजें जारी हैं और लोग कह रहे हैं कि (Guide line Rate Hike) ने संपत्ति की खरीदी-बिक्री को बेहद प्रभावित कर दिया है।
