सीजी भास्कर, 03 दिसंबर। उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में एक बार फिर तनाव का माहौल है। चर्चित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले की सुनवाई 10 दिसंबर को होने वाली है, और उससे पहले पूरा शहर सुरक्षा व्यवस्था (Haldwani Railway Land Case) के घेरे में आ चुका है। लगभग 29 एकड़ रेलवे की जमीन पर बसे 500 से ज्यादा परिवारों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटका है, क्योंकि आने वाला कोर्ट फैसला यह तय करेगा कि क्या इन परिवारों को हटाया जाएगा या उन्हें राहत मिलेगी।
बनभूलपुरा और आसपास के इलाकों में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती कर दी गई है। 400 से अधिक जवान इलाके में गश्त कर रहे हैं और ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। शहर में प्रवेश कर रहे वाहनों और बाहरी लोगों की कड़ी स्क्रीनिंग के लिए कई चेकिंग प्वाइंट भी बना दिए गए हैं।
जिला प्रशासन ने भी किसी तरह की अराजकता रोकने के लिए पहले से एक्शन (Haldwani Railway Land Case) शुरू कर दिया है। 100 से अधिक कथित उपद्रवियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। स्थानीय अधिकारी के अनुसार, “इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखना हमारी पहली प्राथमिकता है। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
विवाद की जड़—2007 से आज तक कोर्ट, प्रशासन और अतिक्रमणकारियों का टकराव
बनभूलपुरा और गफूर बस्ती का यह विवाद आज का नहीं, बल्कि लगभग 17 साल पुराना है।
2007 में हाईकोर्ट ने रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। प्रशासन ने सिर्फ 0.59 एकड़ जमीन ही मुक्त कराई।
2013 में खनन मामले के दौरान यह मुद्दा फिर सामने आया और
2016 में कोर्ट ने 10 हफ्तों में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
इसके बाद मामला और उलझ गया। अतिक्रमणकारियों और राज्य सरकार ने भूमि को ‘नजूल भूमि’ बताते हुए कार्रवाई रोकने की कोशिश की, पर 2017 में हाईकोर्ट ने यह दावा खारिज कर दिया।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से सभी पक्षों को हाईकोर्ट में पुनः दावा पेश करने को कहा गया। लेकिन इसके बाद भी अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मार्च 2022 में दायर एक और जनहित याचिका ने रेलवे की निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट (Haldwani Railway Land Case) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वर्षों तक स्थिति जस की तस बनी रही।
फरवरी 2024 की हिंसा—जब हालात काबू से बाहर हो गए थे
इस इलाके की संवेदनशीलता का अंदाज़ा 2024 की शुरुआत में हुई भयावह हिंसा से लगाया जा सकता है। नगर निगम द्वारा एक अवैध मदरसा और नमाज स्थल को ढहाए जाने के बाद भीड़ भड़क उठी थी। देखते ही देखते पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हुई, जबकि 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात काबू से बाहर होने पर प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा और गोली चलाने तक के आदेश देने पड़े थे।
अब जब मामला फिर कोर्ट में है, शहर का तनाव और भी बढ़ गया है क्योंकि फैसले का सीधा असर सैकड़ों परिवारों के भविष्य और क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर पड़ने वाला है।
29 एकड़ पर कब्जा:
रेलवे भूमि पर 500 से अधिक परिवारों के घर—कोर्ट की सुनवाई तय करेगी अगले कदम।
शहर में अलर्ट मोड:
400 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती, ड्रोन से निगरानी—बनभूलपुरा को बनाया गया सुरक्षा ज़ोन।





