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Home » Heritage Trees Conservation : सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सहेजने की अनूठी पहल

Heritage Trees Conservation : सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सहेजने की अनूठी पहल

By Newsdesk Admin
02/05/2026
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Heritage Trees Conservation
Heritage Trees Conservation

सीजी भास्कर, 2 मई : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में पर्यावरण संरक्षण (Heritage Trees Conservation ) और अपनी जड़ों से जुड़ने की एक नई मुहिम शुरू हुई है। वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के कुशल मार्गदर्शन में जिले भर में धरोहर वृक्ष गणना अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया है।

Contents
  • क्यों खास है यह अभियान
  • जनभागीदारी से बढ़ेंगे कदम
  • वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण
  • वन विभाग की अपील

1 मई से शुरू हुआ यह महाअभियान 15 जून तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य धरोहर वृक्ष संरक्षण (Heritage Trees Conservation ) की दिशा में ठोस कदम उठाना और भविष्य के लिए एक वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार करना है।

क्यों खास है यह अभियान

अक्सर विकास की अंधी दौड़ में हम उन पुराने वृक्षों को भूल जाते हैं जो सदियों से हमारी धरती के रक्षक रहे हैं। इस अभियान के तहत पीपल, बरगद, गूलर और नीम जैसे उन दीर्घायु वृक्षों को चिन्हित किया जा रहा है, जो पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये वृक्ष न केवल भारी मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं और जैव विविधता को आश्रय देते हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध स्थानीय समुदायों की आस्था, लोक-परंपराओं और सामाजिक पहचान से भी है। धरोहर वृक्ष संरक्षण ( Heritage Trees Conservation) के माध्यम से इन जीवित स्मारकों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को इनकी महत्ता बताई जा सके।

जनभागीदारी से बढ़ेंगे कदम

इस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी कार्यप्रणाली है। इसे केवल सरकारी फाइल तक सीमित न रखकर जन-जन का आंदोलन बनाने की कोशिश की गई है। इसमें आम नागरिकों, स्कूली विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

वन विभाग ने तकनीक का सहारा लेते हुए धरोहर वृक्ष संरक्षण के लिए एक सरल प्रक्रिया अपनाई है। नागरिक अपने आसपास के विशाल और प्राचीन वृक्षों की पहचान कर उनका ‘जियो-टैग्ड’ फोटो (स्थान की जानकारी के साथ फोटो) ले सकते हैं। इस जानकारी को विभाग द्वारा जारी किए गए क्यूआर कोड (QR Code) या गूगल फॉर्म के माध्यम से साझा किया जा सकता है। इससे न केवल वृक्ष की स्थिति का पता चलेगा, बल्कि उसकी वर्तमान सेहत और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने में भी मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण

वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने इस पहल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धरोहर वृक्ष केवल लकड़ी का ढांचा नहीं हैं, बल्कि वे हमारे पूर्वजों के साक्ष्य और हमारी संस्कृति की पहचान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि धरोहर वृक्ष संरक्षण के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह विश्लेषण किया जाएगा कि जिले के कौन-कौन से वृक्ष स्थानीय स्तर पर विशेष महत्व रखते हैं। इस डेटा के आधार पर भविष्य में इन वृक्षों के संवर्धन, सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु एक प्रभावी कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाएगी।

अभियान के दौरान उन वृक्षों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जो पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में ‘की-स्टोन’ प्रजाति के रूप में कार्य करते हैं। वनाधिकारियों का मानना है कि इस डिजिटल गणना से प्राप्त जानकारी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

वन विभाग की अपील

प्रशासन ने जिले के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे इस पवित्र कार्य में अपना योगदान दें। यदि आपके गांव, मोहल्ले या खेत में कोई ऐसा प्राचीन वृक्ष है जिसे लोग पूजते हों या जो अपनी विशालता के लिए जाना जाता हो, तो उसकी जानकारी साझा कर धरोहर वृक्ष संरक्षण के इस महायज्ञ में आहुति दें। आपके द्वारा दी गई एक छोटी सी जानकारी एक पुराने वृक्ष को संरक्षण की ढाल प्रदान कर सकती है।

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