सीजी भस्कर, 02 मई । दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस को लेकर लंबे समय से चल रही शिकायतों के बीच अब माहौल बदलता नजर (School Fees) आ रहा है। अभिभावकों के बीच इस फैसले की चर्चा तेजी से फैल गई है और कई लोग इसे राहत भरा कदम मान रहे हैं। खासकर वे परिवार, जो एक साथ भारी फीस जमा करने के दबाव से परेशान थे, अब थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं।
स्कूलों के बाहर और अभिभावक समूहों में इसी मुद्दे पर बातचीत हो रही है कि आखिर अब नियम क्या होंगे और इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर कैसे पड़ेगा। कई लोगों का कहना है कि यह फैसला समय पर लिया गया है, जिससे आर्थिक दबाव कम हो सकता है।
क्या है नया निर्देश (School Fees)
Directorate of Education ने एक अहम आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब कोई भी निजी, मान्यता प्राप्त और बिना सरकारी सहायता वाले स्कूल अभिभावकों पर एक साथ एक महीने से ज्यादा फीस जमा करने का दबाव नहीं बना सकते। इस निर्देश के लागू होने के बाद स्कूलों को फीस वसूली के तरीके में बदलाव करना होगा और तय नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
शिकायतों के बाद उठाया कदम
शिक्षा विभाग के अनुसार उन्हें कई अभिभावकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में कहा गया था कि कुछ स्कूल दो से तीन महीने की फीस एक साथ जमा करने के लिए दबाव बना रहे थे।
इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट आदेश जारी किया गया है कि एक महीने से अधिक फीस लेने के लिए मजबूर करना सही नहीं है और इससे परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।
पुराने नियम का भी जिक्र
नए आदेश में पहले जारी किए गए एक पुराने सर्कुलर का भी उल्लेख किया (School Fees) गया है। इसमें अदालत के फैसले का हवाला देते हुए पहले ही यह कहा जा चुका था कि फीस मासिक आधार पर ही ली जानी चाहिए। अब एक बार फिर से उसी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है, ताकि किसी भी तरह की मनमानी पर रोक लगाई जा सके।
अभिभावकों को बड़ी राहत
इस फैसले के बाद अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर वे परिवार जो एक साथ ज्यादा रकम जमा करने में कठिनाई महसूस करते थे, उनके लिए यह कदम काफी मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर आगे सख्त कार्रवाई हो सकती है।


