सीजी भास्कर, 10 जनवरी। पति-पत्नी के रिश्ते में अविश्वास और शक किस हद तक विनाशकारी हो सकता है, इस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court divorce judgment) ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि कोई जीवनसाथी बिना किसी ठोस सबूत के दूसरे के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाता है, तो यह केवल पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि मानसिक क्रूरता मानी जाएगी।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक डॉक्टर पति को तलाक की अनुमति देते हुए पत्नी द्वारा लगाए गए अफेयर के आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दिया।
आरोप गंभीर थे, लेकिन साबित कुछ नहीं
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद की खंडपीठ ने पाया कि पत्नी ने पति पर एक महिला डॉक्टर से अवैध संबंध होने जैसे गंभीर आरोप (High Court divorce judgment) लगाए, लेकिन इन दावों के समर्थन में अदालत के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल आशंका, शक या मौखिक आरोप किसी व्यक्ति के चरित्र को कठघरे में खड़ा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते।
शादी, संतान और फिर टूटता रिश्ता
अदालत को बताया गया कि दोनों डॉक्टरों की शादी वर्ष 2008 में हुई थी और एक बेटी भी है। शुरुआती वर्षों के बाद ही वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ने लगा और वर्ष 2014 से दोनों अलग-अलग रहने लगे।
पति की ओर से यह तर्क रखा गया कि पत्नी का व्यवहार लगातार अपमानजनक होता गया—छोटी बातों पर झगड़े, सामाजिक प्रतीकों को अस्वीकार करना और बार-बार चरित्र पर सवाल उठाना मानसिक उत्पीड़न का कारण बना।
फैमिली कोर्ट का फैसला पलटा
इससे पहले दुर्ग स्थित फैमिली कोर्ट ने तलाक की याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस आदेश को पलटते हुए कहा कि मानसिक क्रूरता के स्पष्ट तत्व इस मामले में मौजूद हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कभी-कभार साथ दिखने या मिलने से आरोप सही नहीं ठहराए जा सकते।
भरण-पोषण पर संतुलित फैसला
हालांकि दोनों पक्ष पेशे से डॉक्टर हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर माने गए, फिर भी अदालत ने संतान के भविष्य और लंबे कानूनी विवाद से बचने के उद्देश्य से पति को पत्नी को 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देने (High Court divorce judgment) का निर्देश दिया। यह राशि छह माह के भीतर अदा करनी होगी।
कोर्ट का कड़ा संदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह संदेश भी दिया कि शिक्षित समाज में बिना प्रमाण लगाए गए चरित्र हनन के आरोप रिश्तों को नहीं, बल्कि कानून के दायरे में अपराध जैसी स्थिति तक ले जाते हैं।


