सीजी भास्कर, 29 जून। आवास ऋण हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज (Home Loan Fraud) हो गई है। शुरुआती जांच में ही दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने पर लोन प्रक्रिया रोक दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे मामले का खुलासा किया। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
फर्जी पट्टा और प्रमाण पत्र से किया आवेदन
पुलिस के अनुसार रानीतराई थाना क्षेत्र के ग्राम तेलीगुंडरा निवासी धनेश्वर कुमार निर्मलकर ने करीब 1800 वर्गफुट जमीन का कथित फर्जी पट्टा और पंचायत का नकली प्रमाण पत्र तैयार कर दुर्ग स्थित एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में होम लोन के लिए आवेदन किया था।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
6 जून 2026 को ग्राम पंचायत तेलीगुंडरा की सरपंच हुलेश्वरी साहू ने रानीतराई थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
रिकॉर्ड से नहीं मिले दस्तावेज
जांच के दौरान पंचायत के रिकॉर्ड की जांच की गई और सरपंच सहित अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार आवेदन के साथ लगाए गए पट्टा और प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत द्वारा कभी जारी ही नहीं किए गए थे। दस्तावेजों पर लगी मुहर और प्रमाणन भी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।
लोन आवेदन पहले ही हो चुका था खारिज
जांच के दौरान
पुलिस ने संबंधित हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से भी दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त कीं। कंपनी ने बताया कि सत्यापन के दौरान कई अनियमितताएं मिलने पर होम लोन का आवेदन स्वीकृत नहीं किया गया और उसे निरस्त कर दिया गया था।