Horticulture Department Scam Chhattisgarh : Chhattisgarh के उद्यानिकी विभाग में एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बीच वर्मीबेड खरीदी को लेकर उठे सवालों ने पूरे सिस्टम पर शक की परत डाल दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, खरीदी प्रक्रिया में तय नियमों से हटकर फैसले लिए गए, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
जैम पोर्टल की दर और खरीदी में भारी अंतर
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल पर उपलब्ध उत्पाद की कीमत और विभाग द्वारा खरीदी गई दर में बड़ा अंतर सामने आया है। जहां एक ओर निर्माता कंपनी वही उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध करा रही थी, वहीं विभाग ने उसी प्रोडक्ट को कई गुना अधिक दर पर खरीदा।
कार्टेल बनाकर टेंडर में हेरफेर की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ फर्मों ने मिलकर कार्टेल बनाकर कीमतों को प्रभावित किया। आरोप है कि प्रतिस्पर्धा दिखाने के नाम पर एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग कंपनियों ने समान दरें पेश कीं, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
योजना का उद्देश्य और जमीनी हकीकत
सरकार का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना था, जिसके तहत किसानों को वर्मीबेड उपलब्ध कराए जाने थे। लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत में जल्दबाजी में की गई खरीदी ने इस योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कई जिलों में एक ही पैटर्न पर खरीदी होने की बात भी सामने आई है।
बाहरी कनेक्शन और पुराने मामलों से जुड़ते तार
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले के तार राज्य से बाहर तक जुड़े हो सकते हैं। इससे पहले भी विभाग में सामने आए कुछ मामलों में बाहरी फर्मों की भूमिका पर सवाल उठे थे। इस बार भी कुछ नामों की चर्चा है, जिनकी भूमिका की जांच की मांग उठ रही है।
फर्म की पात्रता पर भी उठे सवाल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि जिस फर्म से खरीदी की गई, उसके पंजीयन और कार्यक्षेत्र को लेकर भी संदेह है। संबंधित फर्म का मुख्य व्यवसाय कुछ और बताया जा रहा है, जबकि खरीदी गया उत्पाद उसके घोषित कारोबार से मेल नहीं खाता।
जैम पोर्टल की कार्यप्रणाली पर फिर बहस
इस पूरे मामले ने Government e-Marketplace (GeM) की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोर्टल के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जाए, तो इसका गलत इस्तेमाल संभव है, जिससे पारदर्शिता प्रभावित होती है।


