Horticulture Department Scam Chhattisgarh : Chhattisgarh के उद्यानिकी विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। भिन्डी, करेला और लौकी के अमानक बीजों की आपूर्ति की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अब वर्मीबेड खरीदी में बड़ा घोटाला सामने आ गया है।
विभाग ने खरीदी 8 गुना महंगी
जानकारी के अनुसार, जैम पोर्टल पर मीपाटेक्स ब्राण्ड का एचडीपीई वर्मीबेड स्वयं निर्माता कंपनी द्वारा करीब 2000 रुपये प्रति नग की दर से उपलब्ध है। वहीं, उसी उत्पाद को उद्यानिकी विभाग ने एआर इंटरप्राइजेस से 16500 रुपये प्रति नग की दर पर खरीदा। यह अंतर करीब 8.25 गुना तक पहुंचता है, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
कार्टेल बनाकर खेला गया पूरा खेल, तीन फर्मों की भूमिका संदिग्ध
मामले में सामने आया है कि एआर इंटरप्राइजेस, आर्मी इन्फोटेक और विश कम्प्यूटर्स—तीनों फर्मों ने एक ही प्रोडक्ट के लिए दरें प्रस्तुत कीं। आरोप है कि इन फर्मों ने आपसी मिलीभगत से कार्टेल बनाकर इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिसमें विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
योजना किसानों के लिए, लेकिन फायदा कहीं और
यह खरीदी केन्द्र सरकार से प्राप्त आबंटन के तहत किसानों को जैविक खाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जानी थी। लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत में जल्दबाजी में की गई इस प्रक्रिया ने योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकहित की इस योजना का लाभ किसानों तक पहुंचने के बजाय कथित तौर पर फर्मों और अधिकारियों तक सीमित रह गया।
Jignesh Patel का नाम फिर चर्चा में
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में गुजरात से जुड़े जिग्नेश पटेल (निकुल मनु भाई पटेल) का नाम सामने आ रहा है। बताया जाता है कि पूर्व में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगने के बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, न ही उनकी फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार शर्मा ने इस मामले में जनसूचना आवेदन भी लगाया है, जिससे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, विभागीय कार्रवाई को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार शर्मा ने इस मामले में जनसूचना आवेदन भी लगाया है, जिससे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, विभागीय कार्रवाई को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
जैम पोर्टल की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जैम पोर्टल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पोर्टल की आड़ में अयोग्य फर्मों से अमानक उत्पादों की खरीदी की जा रही है। जीएसटी विवरण में भी यह सामने आया है कि एआर इंटरप्राइजेस का पंजीयन इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए है, जिसमें वर्मिबेड का कोई उल्लेख नहीं है।


