सीजी भास्कर, 18 जनवरी। छत्तीसगढ़ शासन की किसान-हितैषी योजनाएं अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसका सशक्त उदाहरण राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम लाममेटा के प्रगतिशील किसान त्रवेंद्र साहू हैं, जिन्होंने पारंपरिक धान की खेती से हटकर उद्यानिकी फसलों (Horticulture Farming Success Story) की ओर कदम बढ़ाया और उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
धान की खेती में सीमित मुनाफे को देखते हुए त्रवेंद्र साहू ने फसल विविधीकरण का निर्णय लिया। उन्होंने शासन की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना का लाभ उठाते हुए धान के स्थान पर टमाटर की खेती शुरू की। इस योजना के तहत उन्हें लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने 1.5 एकड़ भूमि में मल्चिंग पद्धति के माध्यम से टमाटर की उन्नत खेती की शुरुआत की।
उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के पौधे, संतुलित उर्वरक और कीटनाशकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया। आधुनिक तकनीकों के समुचित प्रयोग से फसल की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उनकी मेहनत रंग लाई।
इस वर्ष टमाटर की बंपर पैदावार ने किसान त्रवेंद्र साहू की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी। अब तक वे करीब 10 लाख रुपये मूल्य के टमाटर की बिक्री कर चुके हैं, जिसमें से उन्हें लगभग 7 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। वर्तमान समय तक वे लगभग 1000 कैरेट टमाटर बाजार में बेच चुके हैं।
उनके खेत में उगाई गई ‘परी’ किस्म के टमाटर की बाजार में विशेष मांग रही, जिसके कारण उन्हें बेहतर दाम मिले। उच्च गुणवत्ता और आकर्षक आकार के कारण यह टमाटर न केवल स्थानीय बाजारों में, बल्कि राजनांदगांव मंडी के माध्यम से नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों तक भेजे जा रहे हैं।
फिलहाल भी उनके खेतों में टमाटर की तुड़ाई का कार्य जारी है और अनुमान है कि मार्च माह तक उत्पादन बना रहेगा, जिससे आय में और बढ़ोतरी होगी। किसान त्रवेंद्र साहू का कहना है कि धान की तुलना में उद्यानिकी फसल अपनाना उनके लिए कहीं अधिक लाभकारी सिद्ध हुआ है। शासन की योजनाओं, तकनीकी सहयोग और अनुदान ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है।
उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और सब्जी व उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करें। इससे कम भूमि में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी संभव है।
शासन द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन राशि, तकनीकी सहायता और बाजार तक सीधी पहुंच यह साबित करती है कि फसल विविधीकरण के जरिए किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं। त्रवेंद्र साहू की यह सफलता आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है।




