सीजी भास्कर, 30 नवंबर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. आंबेडकर अस्पताल में सोनोग्राफी जांच कराने पहुंचे मरीज इन दिनों भारी दिक्कत का सामना कर रहे हैं। अस्पताल में मौजूद छह सोनोग्राफी मशीनों में से तीन पिछले एक वर्ष से बंद हैं, जिसके चलते (Hospital Sonography Crisis) का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। मरम्मत न होने से रोजाना जांच के लिए आने वाले मरीजों को 10 से 15 दिन बाद की तारीख थमा दी जाती है।
अस्पताल में प्रतिदिन 50 से अधिक मरीज पेट, गर्भावस्था, लीवर, किडनी और अन्य बीमारियों से जुड़ी सोनोग्राफी कराने पहुंचते हैं, लेकिन मशीनों की कमी के कारण जांच की रफ्तार बेहद धीमी है। तकनीशियनों के अनुसार, आधी मशीनें बंद होने से (Hospital Sonography Crisis) और बढ़ गया है। कई गंभीर मामलों में तत्काल सोनोग्राफी आवश्यक होती है, लेकिन स्लॉट न मिलने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों में महंगी जांच कराने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पताल में इलाज सस्ता होता है, लेकिन जांच में इतनी देर होने से पूरा उपचार प्रभावित हो रहा है। राजधानी की एक गर्भवती महिला ने बताया कि डॉक्टर ने तुरंत सोनोग्राफी कराने कहा था, मगर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर 12 दिन बाद की तारीख दी गई। उन्होंने कहा इस तरह की (Hospital Sonography Crisis) का क्या मतलब? अंततः बाहर जाकर हजारों रुपये खर्च करने पड़े। वहीं एक बुजुर्ग मरीज ने बताया कि उन्हें 10 दिन पहले बुलाया गया था और आज भी घंटों इंतजार करना पड़ा।
Hospital Sonography Crisis वेटिंग लिस्ट से मरीज बेहाल
जानकारी के अनुसार, मशीनों की मरम्मत का प्रस्ताव कई बार भेजा गया, लेकिन फाइल विभागों के बीच अटकती रही। एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि यदि मशीनें ठीक हो जाएँ, तो रोजाना दोगुने मरीजों की जांच संभव होगी और लंबी वेटिंग खत्म हो जाएगी। दूर-दराज के मरीजों के लिए यह (Hospital Sonography Crisis) और अधिक मुश्किल पैदा कर रही है। वे बस किराया, भोजन और दिनभर की मेहनत कर शहर आते हैं, लेकिन तारीख मिलने पर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों ने साफ कहा कि बार-बार आना उनके बस में नहीं है, इसलिए ऐसी लंबी वेटिंग जैसी स्थिति को जल्द सुधारा जाना बेहद जरूरी है।
