सीजी भास्कर 1 मार्च बालोद जिले के वांग्राम बड़भूम परिक्षेत्र, गुरूर में वन विभाग के तत्वावधान में और Earth Retreat Foundation के सहयोग से एक दिवसीय जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों में Human Wildlife Conflict Awareness को मजबूत करना था, ताकि जंगल से सटे इलाकों में मानव जीवन की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।
ग्रामीणों को बताए गए सुरक्षा उपाय और मुआवजा योजनाएं
कार्यशाला के दौरान ग्रामीणों को वन्यप्राणियों से संभावित जोखिम, फसल और पशुधन की सुरक्षा के व्यावहारिक उपाय, आपात स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षित कदमों तथा शासन की मुआवजा योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने समझाया कि समय पर सूचना, सामुदायिक सतर्कता और सही प्रक्रिया अपनाने से Human Wildlife Conflict Awareness का असर जमीन पर दिखता है और टकराव की घटनाएं घटाई जा सकती हैं।
लोकनृत्य और कला के जरिए संदेश का प्रसार
अभियान को रोचक बनाने के लिए विद्यार्थियों ने लोकनृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सरल भाषा में संदेश दिया। वहीं पोस्टर, चित्रकला, रंगोली और पेंटिंग के जरिए जंगल संरक्षण, वन्यजीवों की भूमिका और सह-अस्तित्व की भावना को रेखांकित किया गया। इन रचनात्मक प्रस्तुतियों ने Human Wildlife Conflict Awareness को भावनात्मक जुड़ाव के साथ लोगों तक पहुंचाया, जिससे सहभागिता स्वतः बढ़ती नजर आई।
युवाओं की भागीदारी से बढ़ा जनआंदोलन का असर
कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका खास रही। प्रतियोगिताओं में दिखी रचनात्मकता ने यह संकेत दिया कि नई पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण को केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी मान रही है। आयोजकों के मुताबिक, युवाओं की यह भागीदारी Human Wildlife Conflict Awareness को दीर्घकालिक आंदोलन का रूप देने में मददगार होगी।
NGO सहयोग से जमीनी स्तर पर पहुंच
अभियान की रूपरेखा तैयार करने, प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने और जनसंपर्क गतिविधियों में Earth Retreat Foundation की अहम भूमिका रही। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से Human Wildlife Conflict Awareness को गांव-गांव तक ले जाने की रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।






