भारत में 2026 के पुरुष टी20 विश्व कप से पहले ICC Media Rights Crisis गहरा गया है। जियोस्टार ने ICC को आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि भारी आर्थिक दबाव के चलते वह भारत के मीडिया राइट्स कॉन्ट्रैक्ट के शेष दो वर्षों को निभाना मुश्किल मानता है। यह वही करार है, जिसकी वैल्यू करीब 27,000 करोड़ रुपए आंकी गई थी और जिसे एशिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट पैकेजेज़ में गिना जाता है।
ICC ने नई बिडिंग प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बाज़ार में ठंडा माहौल
जियोस्टार के रुख के बाद ICC ने 2026–2029 की अवधि के लिए नए मीडिया राइट्स की बिक्री प्रक्रिया शुरू कर दी है और लगभग 2.4 बिलियन डॉलर की कीमत तय की है।
हालाँकि, इंडस्ट्री स्रोतों के अनुसार, मौजूदा वैल्यूएशन इतनी ऊँची है कि कई कंपनियाँ इस समय दूरी बनाए हुए हैं। संपर्क किए गए प्रमुख खिलाड़ियों—जैसे SPNI, एक प्रमुख ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म, और एक इंटरनेशनल OTT दिग्गज—ने अभी तक स्पष्ट रुचि नहीं दिखाई है।
बाकी ब्रॉडकास्टर्स भी “inflated valuation” को लेकर सतर्क हैं।
जियोस्टार का बढ़ता घाटा बता रहा है—नुकसान मॉडल बदलने का समय आ गया
जियोस्टार ने 2024–25 में स्पोर्ट्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर संभावित नुकसान का प्रावधान 12,319 करोड़ से बढ़ाकर 25,760 करोड़ कर दिया। यह बढ़त दर्शाती है कि लंबी अवधि वाले स्पोर्ट्स राइट्स भारत में व्यवसायिक रूप से अब पहले की तरह व्यवहारिक नहीं रहे।
इसी दबाव में, इससे पहले स्टार इंडिया को भी 2023–24 में 12,548 करोड़ रुपए का घाटा झेलना पड़ा था—जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ICC राइट्स का आर्थिक भार रहा।
भारत—ICC के लिए ‘Revenue Engine’, लेकिन गिरती मार्केट वैल्यू चिंता बढ़ा रही
ICC की कुल कमाई का लगभग 80% हिस्सा भारत से आता है, इसलिए भारत के राइट्स हमेशा महंगे रहते हैं।
लेकिन मौजूदा बाजार स्थितियों में टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म—
• घटते विज्ञापन वॉल्यूम,
• कम होती सब्सक्रिप्शन ग्रोथ,
• और टीवी की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव
का सामना कर रहे हैं।
रियल-मनी गेमिंग विज्ञापनों पर लगे प्रतिबंध के बाद 7,000 करोड़ रुपए का एड-गैप भी बना है, जिसे फिलहाल कोई नया सेक्टर भर नहीं पा रहा।
बड़े OTT प्लेटफॉर्म भी क्रिकेट से दूरी बनाए हुए
नेटफ्लिक्स फिलहाल क्रिकेट से दूर रहकर प्रीमियम मनोरंजन और sports-entertainment hybrid content पर फोकस कर रहा है। वहीं प्राइम वीडियो की क्रिकेट उपस्थिति सीमित है—न्यूजीलैंड साझेदारी अगले साल खत्म हो रही है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में उसके पास 2027 तक ICC राइट्स मौजूद हैं।
स्पोर्ट्स राइट्स की वैश्विक कीमतें बढ़ीं, लेकिन खरीदार सिमटने लगे
NBA, NFL और MLB जैसे ग्लोबल लीग राइट्स की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, जिसके बाद OTT कंपनियाँ अब हर पैकेज पर बोली लगाने से बच रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मौजूदा परिस्थितियाँ यह दिखाती हैं कि “sports rights bubble” अब अपने दबाव में है और खरीदार पहले की तरह आक्रामक निवेश की स्थिति में नहीं हैं।
नया पार्टनर न मिला तो जियोस्टार को 2027 तक निभानी पड़ सकती है जिम्मेदारी
ICC के नियम साफ हैं—अगर मौजूदा डील की अवधि समाप्त होने से पहले नया प्रसारण साझेदार नहीं मिला, तो जियोस्टार को मौजूदा शर्तों पर 2027 तक कॉन्ट्रैक्ट निभाना ही होगा।
हालात जिस दिशा में जा रहे हैं, वे इस ओर इशारा करते हैं कि भारत का स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट मार्केट बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आने वाले वर्षों में राइट्स होल्डर्स के लिए विकल्प सीमित हो सकते हैं।





