सीजी भास्कर, 09 जून। आरंग क्षेत्र में इन दिनों रेत के अवैध कारोबार को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती (Illegal Sand Mining) जा रही है। कई गांवों में बड़े पैमाने पर रेत भंडारण और परिवहन की गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद हैं और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में हालात ऐसे बन गए हैं कि पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में इसका असर जल संरक्षण और ग्रामीण जीवन पर भी दिखाई दे सकता है।
तालाब को बना दिया डंपिंग यार्ड : Illegal Sand Mining
स्थानीय लोगों के अनुसार कुटेला गांव में स्थित एक सार्वजनिक तालाब के हिस्से को मिट्टी और मलबे से पाटकर रेत भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोप है कि यहां लगातार भारी वाहनों के जरिए रेत डंप की जा रही है, जिससे तालाब का स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
कई गांव बने भंडारण केंद्र
बताया जा रहा है कि कुरूद, कुटेला, मोहमेला, हरदीडीह और कागदेही जैसे गांवों में बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि मानसून के दौरान संभावित प्रतिबंध से पहले बड़े पैमाने पर रेत जमा करने की कोशिश की जा रही है।
पर्यावरण पर बढ़ रहा खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध भंडारण और उत्खनन के कारण जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों पर असर पड़ रहा है। तालाबों और अन्य जल संरचनाओं के प्रभावित होने से भविष्य में जल संकट की आशंका भी जताई जा रही है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
ग्राम पंचायत स्तर पर इस मामले को लेकर प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों को जानकारी देने के बावजूद अब तक मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण अवैध गतिविधियां लगातार जारी हैं।
सरपंच ने उठाए सवाल
गांव की सरपंच कमलेश्वरी संतोष जलक्षत्री ने आरोप लगाया है कि मामले को लेकर कई बार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित (Illegal Sand Mining) कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि पर्यावरण और गांव के जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने मांग की है कि अवैध रेत भंडारण स्थलों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद कराया जाए और प्रभावित तालाब को उसके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।



