सीजी भास्कर, 04 जुलाई : आम तौर पर नौकरीपेशा और आम लोगों के बीच यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि यदि उनकी सालाना कमाई टैक्स छूट की बुनियादी सीमा (Income Tax Rules ) से कम है, तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन यह सोच आपको बड़ी कानूनी और वित्तीय मुसीबत में डाल सकती है। आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के सख्त नियमों के मुताबिक, कुछ विशेष और बड़े वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) के दायरे में आने पर, भले ही आपकी सालाना आय 4 लाख रुपये या उससे भी कम क्यों न हो, आपके लिए समय पर ITR दाखिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है।
आइए जानते हैं कि वे कौन सी परिस्थितियां हैं जिनमें कम कमाई के बावजूद टैक्स रिटर्न भरना जरूरी है:
1. इन 5 स्थितियों में ITR भरना है बेहद अनिवार्य
अगर आपकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो भी नीचे दी गई किसी भी एक शर्त के पूरा होने पर आपको रिटर्न फाइल करना ही होगा:
बैंक खाते में भारी नकद (Cash) जमा: यदि आपने किसी एक वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक ‘करेंट अकाउंट’ (Current Account) में 1 करोड़ रुपये से अधिक, या अपने ‘सेविंग्स अकाउंट’ (Savings Account) में 50 लाख रुपये से अधिक कैश जमा किया है।
विदेशी यात्रा पर बड़ा खर्च: यदि आपने खुद की या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा (Foreign Travel) पर 2 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की है।
भारी-भरकम बिजली बिल: यदि आपके घर या व्यवसाय का पूरे साल का कुल बिजली बिल (Electricity Bill) 1 लाख रुपये से अधिक आया है।
विदेश में संपत्ति या खाता: यदि आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में आपकी कोई संपत्ति (Foreign Assets) है, या किसी विदेशी खाते में आप साइनिंग अथॉरिटी (Signing Authority) हैं।
बिजनेस टर्नओवर या प्रोफेशनल इनकम: यदि आपका सालाना व्यावसायिक टर्नओवर 60 लाख रुपये से अधिक है, या किसी प्रोफेशन (जैसे डॉक्टर, वकील, फ्रीलांसर) से ग्रॉस रसीदें 10 लाख रुपये से अधिक हैं।
2. कम आय में भी ITR फाइल करने के बड़े फायदे
कानूनी बाध्यता के अलावा, कम आय होने पर भी ‘निल रिटर्न’ (Nil ITR) दाखिल करने से आपको कई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ मिलते हैं:
लोन और क्रेडिट कार्ड में आसानी: भविष्य में जब भी आप होम लोन (Home Loan), कार लोन या बिजनेस लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक आपसे पिछले 3 सालों का ITR रिकॉर्ड मांगते हैं। मजबूत ITR आपके वित्तीय रिकॉर्ड को भरोसेमंद बनाता है।
TDS रिफंड पाना: यदि आपके वेतन, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज या किसी अन्य भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) हुई है, तो उस कटे हुए पैसे को वापस (Refund) पाने का एकमात्र जरिया ITR दाखिल करना ही है।
शेयर बाजार के नुकसान को एडजस्ट करना: यदि आपको शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी अन्य निवेश से कोई पूंजीगत नुकसान (Capital Loss) हुआ है, तो उसे आगामी वर्षों के मुनाफे से समायोजित (Set-off/Carry Forward) करने के लिए रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है।
3. टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह: ई-वेरिफिकेशन है सबसे जरूरी
कर विशेषज्ञों (Tax Experts) के अनुसार, ITR दाखिल करने की प्रक्रिया केवल फॉर्म सबमिट करने पर खत्म नहीं होती। रिटर्न भरने से पहले आपको अपने बैंक खातों, निवेशों और फॉर्म 26AS/AIS (Annual Information Statement) में दर्ज टीडीएस (TDS) का सही मिलान कर लेना चाहिए। उचित ITR फॉर्म का चयन करने के बाद, निर्धारित समयावधि के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के दाखिल किया गया ITR पूरी तरह से अमान्य (Invalid) माना जाता है और आयकर विभाग उसे प्रोसेस नहीं करता है। इसलिए, भविष्य की किसी भी कानूनी पेचीदगी से बचने के लिए समय रहते अपना रिटर्न जरूर फाइल करें।



