सीजी भास्कर, 04 जुलाई : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र से एक बड़ी और सनसनीखेज (Bilaspur Kota Police Station) कानूनी कार्रवाई की खबर सामने आई है। एक ईसाई परिवार का कथित रूप से सामाजिक बहिष्कार (Social Boycott) करने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के मामले में अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट के सीधे हस्तक्षेप और आदेश पर कोटा थाना पुलिस ने चर्च कमेटी के पास्टर (Pastor) सहित कुल सात पदाधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। आरोप है कि इन पदाधिकारियों ने पूरे समाज में पीड़ित परिवार से नाता तोड़ने का फरमान सुनाया था।
सुख-दुख में शामिल होने पर लगाया प्रतिबंध
कोटा पुलिस को सौंपे गए (Bilaspur Kota Police Station) शिकायती दस्तावेज और अदालती आदेश के अनुसार, यह पूरा विवाद मिशन कंपाउंड स्थित सीएनआई (CNI) चर्च की नई कमेटी के गठन के बाद शुरू हुआ। पीड़ित हरीश लाल और उनके परिवार का आरोप है कि चर्च की इस नई कमेटी ने उनके खिलाफ पूरे समाज में एक अपील और संदेश प्रसारित किया। इस फरमान में समाज के अन्य लोगों से कहा गया कि वे हरीश लाल के परिवार से किसी भी प्रकार की बातचीत न रखें, उनके घर न जाएं और उनके किसी भी सुख-दुख या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल न हों। इस तुगलकी फरमान के कारण पीड़ित परिवार पिछले दो वर्षों से भयंकर मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक अलगाव का सामना कर रहा था।
थाने में नहीं हुई सुनवाई, तो पीड़ित ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
पीड़ित हरीश लाल ने इस प्रताड़ना (Bilaspur Kota Police Station) के खिलाफ सबसे पहले कोटा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि स्थानीय पुलिस द्वारा मामले में कोई ठोस वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस के ढीले रवैये से परेशान होकर पीड़ित ने न्याय के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत का रुख किया। अदालत ने मामले के तथ्यों और सामाजिक बहिष्कार को बेहद गंभीर और नागरिक अधिकारों का हनन मानते हुए कोटा पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए।
अदालत के डंडे के बाद कोटा पुलिस ने हरकत में आते हुए चर्च कमेटी के सात रसूखदार पदाधिकारियों—सौरभ पीटर्स, राजा सालोमान दास, अनिल मसीह, थियोडोर पीटर्स, सुनीलेश पीटर्स, सुलेमान दास और पास्टर मनीष आर. मसीह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम (Protection of Civil Rights Act) के तहत संगीन जुर्म दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है।
धार्मिक पर्वों के अपमान का लगाया मनगढ़ंत आरोप
पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में बताया कि नई कमेटी के पदाधिकारियों ने एक बैठक के दौरान उन पर क्रिसमस और ईस्टर जैसे पवित्र ईसाई धार्मिक पर्वों का अपमान करने का मनगढ़ंत और झूठा आरोप मढ़ा था। इसके बाद पूरे परिवार को “नॉट इन गुड स्टैंडिंग” (Not in Good Standing) घोषित कर समाज से पूरी तरह बेदखल कर दिया गया। हरीश लाल ने यह भी आरोप लगाया कि चर्च के एक उच्च पदाधिकारी ने इस बहिष्कार को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक करार दिया था, इसके बावजूद स्थानीय कमेटी अपनी जिद पर अड़ी रही। प्रताड़ना यहीं नहीं रुकी; आरोपियों ने मिशन कंपाउंड में स्थित पीड़ित के कार गैरेज के मुख्य गेट पर अवैध रूप से ताला जड़ दिया, जिससे उनका रोजी-रोटी का व्यवसाय भी ठप हो गया। फिलहाल कोटा पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने और आरोपियों की भूमिका की सघन जांच कर रही है।



