सीजी भास्कर 10 जनवरी रायपुर में आयोजित India International Rice Summit के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों और राइस उद्योग से जुड़े लोगों के लिए बड़ी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मंडी में लगने वाले शुल्क को आगामी एक वर्ष के लिए पूरी तरह शून्य करने का ऐलान किया। यह निर्णय राइस मिलर्स और कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठनों की लंबे समय से उठ रही मांग के बाद लिया गया।
छत्तीसगढ़ बना आयोजन का केंद्र
समिट को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का दूसरा संस्करण छत्तीसगढ़ में होना राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि धान और चावल की जितनी विविध किस्में छत्तीसगढ़ में पाई जाती हैं, उतनी देश के बहुत कम राज्यों में देखने को मिलती हैं। यही वजह है कि राज्य को देश का “धान कटोरा” कहा जाता है।
हजारों किस्मों की झलक, ऑर्गेनिक पर फोकस
समिट में लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां पारंपरिक से लेकर आधुनिक किस्मों तक चावल की व्यापक श्रृंखला देखने को मिली। दंतेवाड़ा सहित आदिवासी अंचलों के स्टॉल्स ने विशेष ध्यान खींचा। साथ ही ऑर्गेनिक खेती और चावल उत्पादन में हो रही प्रगति (Organic Rice Export) को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए।
90 देशों तक पहुंच रहा छत्तीसगढ़ का चावल
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ से करीब एक लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात 90 से अधिक देशों में किया जा रहा है। राज्य में धान उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और सरकार किसानों को हर स्तर पर सहयोग दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में और अधिक देशों तक छत्तीसगढ़ के चावल को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
भविष्य के लिए अहम साबित होगा समिट
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह समिट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों, उद्योग और निर्यात को नई दिशा देने वाला मंच है। मंडी शुल्क को शून्य करने का फैसला राज्य के कृषि और राइस प्रोसेसिंग सेक्टर को नई गति देगा और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा।


