भारत और रूस के रिश्तों में एक बार फिर नई गर्माहट लौटती दिख रही है। India-Russia Strategic Visit के तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज से दो दिवसीय भारत यात्रा पर आ रहे हैं। यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों देशों के लिए बेहद रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
अमेरिकी दबाव और वैश्विक तनाव के बीच अहम बातचीत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका के टैरिफ दबाव और व्यापारिक नीतियों के बीच, भारत का यह रुख दुनिया भर की नज़र में है। ऐसे समय में दोनों देशों के बीच India-Russia Cooperation पर होने वाली चर्चा आने वाले वर्षों के लिए गहरा प्रभाव छोड़ सकती है। बैठक में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी साझेदारी को मजबूत करने पर जोर रहने की उम्मीद है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा
रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद पुतिन का यह पहला भारत दौरा है, जिसकी वजह से यह यात्रा और भी खास हो जाती है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (Small Modular Reactor—SMR Technology) पर संभावित सहयोग की भी चर्चा हो सकती है, जो भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम माना जाएगा।
रक्षा सहयोग और व्यापार इस बैठक का मुख्य केंद्र
भारत और रूस दशकों से रक्षा साझेदारी (Bilateral Defence Partnership) के मजबूत स्तंभ रहे हैं। इस यात्रा के दौरान संयुक्त उत्पादन, तकनीकी ट्रांसफर और रक्षा उपकरणों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। व्यापारिक मोर्चे पर भी भारत-रूस संबंध नए रिकॉर्ड छू सकते हैं, खासकर कच्चे तेल और ऊर्जा क्षेत्र में।
पुरानी दोस्ती में नया अध्याय, भविष्य में बड़े संकेत
दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात एससीओ सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां उनकी एक साथ यात्रा करने की तस्वीरें काफी चर्चा में रहीं। उसी संबंध की निरंतरता में यह दौरा भारत-रूस के भरोसे और सहयोग को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों की विदेश नीति में नया मोड़ ला सकती है।


