सीजी भास्कर, 4 दिसंबर। रायपुर में खेला गया वनडे सिर्फ एक मैच नहीं था, ये भारतीय क्रिकेट (India vs South Africa) के लिए वह रात साबित हुई जिसने 358 जैसा विशाल स्कोर भी बौना दिखा दिया। क्रिकेट की किताब में आम तौर पर यह लिखा है कि 350+ का लक्ष्य किसी भी टीम के लिए पीछा करना मुश्किल होता है,
लेकिन साउथ अफ्रीका ने इस धारणा को रायपुर की गर्मी और देर रात की ओस में पिघला दिया। भारतीय बल्लेबाजों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन गेंदबाजी और फील्डिंग की कमजोरियों ने पूरी मेहनत को पानी कर दिया। यही वो बिंदु हैं जहां से भारत की जीत हार में बदलने लगी।
रायपुर की पिच पर रात के समय ओस का असर किसी छिपे हुए गेंदबाज़ जैसा था। भारतीय बल्लेबाजों ने रन तो भारी संख्या में बनाए, मगर दूसरी पारी में विकेट सूखे नहीं बल्कि गीले थे। गेंदबाज पकड़ और नियंत्रण खोते रहे, स्लोअर वन भी पकड़ में नहीं आया। गेंद बैट पर रबर की तरह चिपकती गई और अफ्रीकी बल्लेबाजों ने रन ऐसे निकाले जैसे यह नेट प्रैक्टिस हो।
358 का पहाड़ तो दिखा, मगर उसे और ऊंचा किया जा सकता था। 40वें ओवर (India vs South Africa) के बाद भारत के रन प्रवाह पर ब्रेक लगा। अंतिम 60 गेंदों पर सिर्फ 74 रन, यानी 8 रन प्रति ओवर भी नहीं। राहुल और जडेजा की साझेदारी संभली ज़रूर, पर तेज नहीं चली। अगर आखिरी ओवरों में कुछ और बड़े शॉट्स निकलते, तो शायद कहानी दूसरी होती।
अफ्रीकी बल्लेबाज जहां चाहें वहां गेंद भेज रहे थे और भारतीय गेंदबाज लाइन-लेंथ तलाशते रह गए। प्रसिद्ध कृष्णा ने दो विकेट लेकर शुरुआत में उम्मीद जगाई, लेकिन रन लुटाने में भी पीछे नहीं रहे – 8 ओवर में 79 रन। कुलदीप यादव भी रन रोक नहीं पाए। जब गेंदबाज़ी ताबीज की तरह काम नहीं करती, तो बड़ा टोटल भी छोटी मोमबत्ती की लौ जैसा लगने लगता है।
यशस्वी जायसवाल इस मैच में दोहरे दबाव के नाम रहे – बल्ले से योगदान नहीं दे सके और फील्ड में कैच छोड़कर टीम को महंगा पड़ा। मार्करम का वह ड्रॉप्ड कैच शायद पूरे मैच की दिशा बदलने वाला क्षण था। उस समय मार्करम 50+ पर थे, मौका मिला और उन्होंने शतक से जवाब दिया। एक कैच = 50 रन का नुकसान।
ओवरथ्रो, मिसफ़ील्ड, स्लिपेज, गलत थ्रो — रातभर भारतीय फील्डिंग ने अफ्रीकी बल्लेबाजों को बोनस (India vs South Africa) रन दिए। गेंद जहां गई, रन वहीं पैदा हुए। इतनी ढिलाई के साथ 358 भी असुरक्षित लगने लगा। क्रिकेट मैदान पर यही छोटी-छोटी गलतियां मिलकर बड़ी हार बना देती हैं।
358 रन बनाए गए लेकिन शरीर मजबूत था, नसें कमजोर। भारत ने स्कोर खड़ा किया जरूर, पर उसे बचाने का आत्मविश्वास नहीं दिखा सका। गेंदबाजी में तीखापन नहीं, फील्डिंग में धार नहीं और अंत में ओस ने सारी गणित बदल दी। रायपुर की यह हार यादों में रहेगी — बतौर सबक, बतौर चेतावनी।





