IRCTC Rail Neer Water Controversy : सिरगिट्टी स्थित रेल नीर प्लांट का मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां आईआरसीटीसी ने जल संसाधन विभाग से मात्र 25 पैसे प्रति लीटर की दर से पानी लेकर उसे बोतलबंद किया और यात्रियों तक 15 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर पहुंचाया। हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा मार्जिन होने के बावजूद प्लांट पर 13 करोड़ 67 लाख रुपये की देनदारी बन गई। यह आंकड़ा अपने आप में पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
पांच साल, कई ठेकेदार, अधूरा हिसाब
बीते पांच वर्षों में इस रेल नीर प्लांट को तीन से चार अलग-अलग ठेका कंपनियों ने संचालित किया। हर बार संचालन बदला, लेकिन बकाया राशि का बोझ बढ़ता चला गया। अंततः करोड़ों रुपये का भुगतान छोड़े जाने के बाद प्लांट को बंद करना पड़ा। पिछले एक साल से उत्पादन पूरी तरह ठप है, जबकि इसी अवधि में यहां से 90 करोड़ रुपये से अधिक का पानी बेचे जाने का रिकॉर्ड मौजूद है।
दोबारा शुरुआत बनी चुनौती
आईआरसीटीसी के सामने अब दोहरी परेशानी है। एक ओर जल संसाधन विभाग की 13 करोड़ 67 लाख रुपये की बकाया राशि, दूसरी ओर पुराने प्लांट का नवीनीकरण और रिन्यूअल। बिना पुराने हिसाब चुकाए नए सिरे से संचालन शुरू करना आसान नहीं दिख रहा। यही वजह है कि प्लांट को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया लगातार अटकती जा रही है।
टेंडर आए, पर समाधान नहीं
पिछले एक साल में आईआरसीटीसी ने दो से तीन बार प्लांट को ठेके पर देने के लिए टेंडर निकाले। हालांकि कंपनियों की रुचि सीमित रही। संभावित ठेकेदारों ने पहले जल संसाधन विभाग से जुड़े पुराने बकायों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग रखी, जिसके चलते प्लांट संचालन की दिशा में कोई ठोस कदम आगे नहीं बढ़ पाया।
रोज़ लाखों की बिक्री, फिर भी बकाया
अपने सक्रिय दिनों में यह प्लांट रोज़ औसतन 40 हजार बोतल पानी बेचता था, जिससे लगभग 5 लाख रुपये प्रतिदिन की आमदनी होती थी। रांची, धनबाद, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और झारसुगड़ा जैसे रेलवे स्टेशनों तक रोज़ बड़ी खेप भेजी जाती थी। बावजूद इसके, 10 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट से पांच साल में 90 करोड़ रुपये का कारोबार होने के बाद भी 13 करोड़ 40 लाख रुपये की बकाया राशि अदा नहीं की गई। अब विवाद के समाधान और नए टेंडर की प्रक्रिया साथ-साथ आगे बढ़ रही है।




