जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की चार सीटों पर चुनाव में हुआ खेला (Jammu Kashmir Rajya Sabha Elections)
— भाजपा को रोकने की नेकां, कांग्रेस व पीडीपी की व्यूहरचना हुई ध्वस्त
— चार सीटों में से तीन गई नेकां के खाते में, चौथी पर भाजपा हुई काबिज
सीजी भास्कर, 24 अक्टूबर। जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद पहली बार हुए राज्यसभा चुनाव में खेला (Jammu Kashmir Rajya Sabha Elections) हो गया और भाजपा को घेरने के लिए निर्दलियों व छोटे दलों को साथ लेकर नेकां, पीडीपी व कांग्रेस की व्यूहरचना ध्वस्त हो गई। भाजपा उम्मीदवार और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा 28 विधायकों के समर्थन के साथ विधानसभा भवन पहुंचे थे, लेकिन जब मतपेटी खुली तो उनके खाते में 32 वोट निकले। इतना ही नहीं तीन अन्य वोट रद हो गए। अपने तीन उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजकर नेकां संतुष्ट हो सकती है पर चौथी सीट पर भाजपा को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।
वर्ष 2021 से जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की चार सीटें रिक्त पड़ी थी। इससे पहले पीडीपी के पास दो, कांग्रेस और भाजपा के पास एक-एक राज्यसभा सीट थी। चुनाव की घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि तीन सीटें नेकां के खाते में जाना तय है पर नामांकन के अंतिम दौर में जिस तरह उमर अब्दुल्ला ने स्वयं कमान संभाली और चौथे प्रत्याशी को मैदान में उतार भाजपा की राह मुश्किल करनी चाही। वह भाजपा विरोध के नाम पर पीडीपी, आप और निर्दलियों को साथ लेकर 58 विधायकों के समर्थन का दावा करते दिखे थे (Jammu Kashmir Rajya Sabha Elections)।
इससे पूर्व सुबह से ही सभी दलों के प्रतिनिधि श्रीनगर विधानसभा भवन परिसर में बनाए मतदान केंद्र में मतदान के लिए पहुंचना आरंभ हो गए थे। भितरघात की आशंका पर नेकां ने पहले ही व्हिप जारी की थी। नेकां संग कांग्रेस ने भी पर्यवेक्षक तैनात किए थे, जो विधायकों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। शाम चार बजे से पहले ही सभी विधायक मतदान कर चुके थे। विधानसभा में वर्तमान में 88 सदस्यों में से पीपुल्स कान्फ्रेंस के सज्जाद गनी लोन ने वोटिंग से किनारा किया। पीएसए के तहत जेल में बंद आप के विधायक मेहराज मलिक ने डाकमत के जरिए मताधिकार का प्रयोग किया। सबसे पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मतदान किया (Jammu Kashmir Rajya Sabha Elections)।
नेकां नेता निर्दलीय विधायकों पर अंतिम समय में पास पलटने का आरोप लगाते दिखे पर चुनाव से दूरी बनाने वाले पीपुल्स कान्फ्रेंस के सज्जाद गनी लोन ने इसे भाजपा व नेकां के बीच फिक्स मैच करार दिया है।
यूं समझें पूरा खेल (Jammu Kashmir Rajya Sabha Elections)
चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा के चार सदस्यों के चुनाव के लिए तीन अधिसूचनाएं जारी की थीं। अर्थात प्रत्येक विधायक ने तीन बार वोट किया। पहली और दूसरी अधिसूचना में नेकां के दो उम्मीदवार सज्जाद किचलू और मोहम्मद रमजान चुने गए। तीसरी अधिसूचना के तहत दो सदस्य चुने गए। इसमें नेकां ने दो उम्मीदवार और भाजपा ने एक उम्मीदवार को उतारा था। एक सीट नेकां के खाते में जानी तय थी और दूसरी के लिए ही जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही थी।
जब मतों की गिनती हुई तो भाजपा प्रत्याशी सत शर्मा को 28 की जगह 32 वोट मिले। इतना ही नहीं तीन अन्य वोट रद हो गए। नेकां के गुरविंदर सिंह ओबराय उर्फ शमी ओबराय को 31 और अंतिम समय पर मैदान में उतारे गए इमरान नबी डार को 21 वोट मिले। इस तरह सत शर्मा और शमी ओबराय निर्वाचित घोषित हो गए। नेकां को यहां कुल 52 मत मिले।
भाजपा को मिले अतिरिक्त वोट पर उमर ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्यसभा की चारों सीटों के परिणाम सामने आने के बाद अपने एक्स हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा का मिले चार अतिरिक्त वोटों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नेकां के किसी विधायक ने क्रास वोटिंग नहीं की। ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा को चार अतिरिक्त वोट कहां से आए? कौन से विधायक जानबूझकर गलत प्राथमिकता संख्या चिन्हित करते अपने वोटों को अमान्य कर रहे थे? क्या उनमें हिम्मत है कि वे हाथ उठाकर यह स्वीकार करें कि उन्होंने हमें वोट देने का वादा करके बीजेपी की मदद की? किस दबाव या प्रलोभन ने उन्हें यह विकल्प चुनने पर मजबूर किया?




